आलीशान है कॉलेज भवन पर जब गुरु ही नहीं तो ज्ञान कहां से आये

आलीशान है कॉलेज भवन पर जब गुरु ही नहीं तो ज्ञान कहां से आये

लोहरदगा़ जिला मुख्यालय के बरही स्थित महिला महाविद्यालय में शिक्षा व्यवस्था की जो तस्वीर उभर कर सामने आयी है, वह जितनी आश्चर्यजनक है उतनी ही डरावनी भी. यहां 800 छात्राओं का नामांकन तो ले लिया गया है, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए कॉलेज में एक भी नियमित शिक्षक मौजूद नहीं हैं. जब इस बात का पता कॉलेज आने पर छात्राओं को हुआ तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गयी. अभिभावक परेशान हो गये. लोगों ने खूब दौड़-धूप की कि अब बच्चों का कहीं अन्यत्र नामांकन करा लें ताकि उनका भविष्य बच सके़ लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. आलम यह है कि बेटियां बड़े चाव से कॉलेज तो आती हैं, पर घंटों खाली बेंचों पर समय गुजार कर वापस घर लौट जाती हैं. लोहरदगा, गुमला और लातेहार जिले की इन छात्राओं के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ से अभिभावकों में भारी आक्रोश है. जब राष्ट्रपति ने कहा था- काश! मुझे भी यहां पढ़ने का मौका मिलता : बरही स्थित इस भव्य महाविद्यालय भवन का उद्घाटन वर्ष 2021 में तत्कालीन राज्यपाल और वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा बड़े ताम-झाम के साथ किया गया था. उस समय वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव और तत्कालीन सांसद सुदर्शन भगत भी मौजूद थे. अपने भावपूर्ण संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा था कि काश! उनके समय में ऐसी सुविधाएं होतीं, तो उन्हें भी यहां पढ़ने की इच्छा होती. उनके शब्दों ने तब सबकी आंखें नम कर दी थीं, लेकिन आज वही भवन शिक्षकों के अभाव में शो-पीस बनकर रह गया है. नामांकन तो हुआ, पर चांसलर पोर्टल ने दिया धोखा : छात्राओं ने बताया कि नामांकन के लिए उन्हें कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. चांसलर पोर्टल के माध्यम से हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, अर्थशास्त्र, वाणिज्य, मनोविज्ञान और राजनीति विज्ञान जैसे प्रमुख विषयों में दाखिला तो हो गया, लेकिन कॉलेज आने पर पता चला कि यहां इन विषयों का एक भी शिक्षक नहीं हैं. वर्तमान में केवल नागपुरी विषय की ही पढ़ाई हो पा रही है, जबकि कुड़ुख समेत अन्य विषयों की छात्राएं भगवान भरोसे हैं. क्या कहते हैं जिम्मेदार : प्रिंसिपल का दर्द : मैं खुद दुखी हूं : कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ शशि गुप्ता ने कहा कि छात्राओं का नामांकन होने के बावजूद शिक्षकों की पदस्थापना न होना दुखद है. उन्होंने कई बार रांची विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पत्र लिखकर शिक्षकों की नियुक्ति का अनुरोध किया है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. यह काफी दुखद स्थिति है़ सांसद की पहल : राज्यपाल से करेंगे मुलाकात : लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने इस स्थिति पर गहरा अफसोस जताया है. उन्होंने कहा कि वह शीघ्र ही झारखंड के राज्यपाल से मिलकर शिक्षकों की पदस्थापना की मांग करेंगे. मेरी कोशिश होगी कि यहां नामांकित छात्राओं को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की व्यवस्था रांची विश्वविद्यालय करे. उन्होंने स्पष्ट किया कि बेटियों के भविष्य के साथ किसी भी कीमत पर खिलवाड़ नहीं होने दिया जायेगा. अभिभावकों की पीड़ा: साहब! या तो शिक्षक दें या नारा मिटा दें : अपनी बेटी का भविष्य अंधकार में देख अभिभावक वीरेंद्र प्रसाद खासे परेशान हैं. उन्होंने कहा कि उनकी बेटी जबरदस्त मानसिक तनाव से गुजर रही है. अन्य अभिभावकों और छात्राओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि विभाग शिक्षक नहीं दे सकता, तो ””””बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ”””” के नारे को दीवारों से मिटा देना चाहिए.

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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