सामुदायिक शौचालय नहीं रहने से दुकानदार व ग्राहक परेशान

सामुदायिक शौचालय नहीं रहने से दुकानदार व ग्राहक परेशान

किस्को़ किस्को थाना के समीप बाजार समिति द्वारा संचालित दुकानों में आज तक एक भी सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं की गयी है. इस कारण दुकानदारों और ग्राहकों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. खासकर महिलाओं के लिए स्थिति बेहद असहज हो जाती है. प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम में लोगों ने इस गंभीर समस्या को खुले तौर पर रखा. लोगों ने कहा कि एक ओर सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव-गांव में शौचालय बनवाकर खुले में शौच से मुक्ति दिलाने का दावा करती है, वहीं, दूसरी ओर किस्को चौक जैसे भीड़भाड़ वाले बाजार में एक भी सामुदायिक शौचालय नहीं है. यहां बाजार समिति द्वारा करीब 18 दुकानें संचालित होती हैं. रोजाना आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग खरीदारी के लिए यहां पहुंचते हैं. मगर शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा न होने से सभी को कठिनाई उठानी पड़ती है. पुरुष किसी तरह खुले में काम चला लेते हैं, लेकिन महिला ग्राहकों के लिए स्थिति बेहद शर्मिंदगी और परेशानी भरी हो जाती है. स्थानीय दुकानदार आकाश कुमार ने कहा कि शौचालय नहीं रहने से हम दुकानदारों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. पुरुष तो किसी तरह गुजारा कर लेते हैं, लेकिन महिलाओं की दिक्कतें और बढ़ जाती हैं. दिलीप साहू ने कहा कि महिला ग्राहकों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है, परंतु लोकलज्जा के कारण वे अपनी समस्या बताने से कतराती हैं. प्रशासन को चाहिए कि एक नहीं बल्कि दो सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराये. देवानंद साहू ने कहा कि इतने बड़े बाजार में जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटती है, वहां एक भी सामुदायिक शौचालय न होना बेहद शर्मनाक स्थिति है. लोग मजबूरी में इधर-उधर गंदगी फैलाते हैं, जिससे माहौल अस्वच्छ हो रहा है. दिवाकर साहू और अन्य दुकानदारों ने भी कहा कि शौचालय निर्माण अति आवश्यक है. महिलाओं की संख्या ग्राहकों में बड़ी होती है, ऐसे में उन्हें सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन वे इसे कहने से भी संकोच करती हैं. लोगों का कहना है कि जब प्रखंड मुख्यालय में ही ऐसी स्थिति है तो अन्य जगहों की हालत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर अब तक ध्यान देना उचित नहीं समझा है. बाजारवासियों ने प्रशासन से अविलंब सामुदायिक शौचालय निर्माण की मांग की है. समस्या को लेकर लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है.

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By Shailesh ambashtha

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