सात साल तक दवा खाने से ही मिल सकता है इस बीमारी से छुटकारा : डॉ संजीत

सात साल तक दवा खाने से ही मिल सकता है इस बीमारी से छुटकारा : डॉ संजीत

सेन्हा़ झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय एवं सिविल सर्जन के निर्देश पर प्रखंड में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान जोरों पर है. बूथ स्तर पर दवा खिलाने के बाद अब 10 फरवरी से स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा डोर-टू-डोर अभियान शुरू किया गया है. इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिला रही हैं. यह अभियान आगामी 25 फरवरी तक निरंतर जारी रहेगा. बचपन में मच्छर काटने से होती है बीमारी : प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ संजीत आनंद ने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जो बचपन में परजीवी मच्छरों के काटने से होती है. इसके लक्षण 15 वर्ष की आयु के पश्चात दिखायी देते हैं. इसमें पैर फूलकर ””””हाथी पांव”””” बन जाता है और यह शरीर के अन्य अंगों के साथ-साथ हाइड्रोसिल को भी प्रभावित करता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को यह बीमारी हो जाये, तो लगातार सात साल तक दवा खाने के बाद ही इससे छुटकारा मिल सकता है. धार्मिक स्थलों व गांवों में दी जा रही दवा : अभियान के तहत शुक्रवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सेन्हा के कर्मियों ने प्रखंड की छोटी व बड़ी मस्जिद के पास और सेन्हा गांव के विभिन्न टोलों में भ्रमण कर ग्रामीणों को अपने सामने दवा खिलायी. टीम में आंगनबाड़ी सेविका, स्वास्थ्य सहिया और विभाग के कर्मचारी शामिल हैं, जो एल्बेंडाजोल और डीइसी की गोलियां दे रहे हैं. ये थे उपस्थित : मौके पर पिरामल संस्था के प्रखंड समन्वयक सतीश कुमार, एमपीडब्ल्यू अनुज सिन्हा, गन्दूर उरांव, मंसूर अंसारी सहित कई स्वास्थ्यकर्मी सक्रिय रहे. विभाग ने अपील की है कि स्वस्थ व्यक्ति भी साल में एक बार फाइलेरिया की दवा जरूर लें ताकि इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके.

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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