लोहरदगा: करोड़ों का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बना 'सफेद हाथी', 3 साल से खराब, महिलाएं 2 KM दूर नदी से लाती है पानी

Lohardaga Water Crisis: लोहरदगा जिले के किस्को प्रखंड अंतर्गत परहेपाठ पंचायत में 'हर घर नल योजना' दम तोड़ रही है. करोड़ों की लागत से बना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पिछले तीन वर्षों से बेकार पड़ा है, जिसके कारण हजारों ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं. भीषण गर्मी के बीच महिलाएं 2 किलोमीटर पैदल चलकर जोरी नदी से पानी लाने को विवश हैं.

Lohardaga Water Crisis, लोहरदगा (गोपी कृष्ण कुंवर): केंद्र और झारखंड सरकार की ‘हर घर नल योजना’ लोहरदगा जिले के परहेपाठ पंचायत में सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है. किस्को आवासीय विद्यालय के समीप करोड़ों रुपये की लागत से बना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पिछले तीन वर्षों से खराब पड़ा है. आलम यह है कि किस्को, गोसाई टोली और जनवल के लगभग एक हजार से अधिक परिवारों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट के संचालन में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण यह योजना पूरी तरह विफल साबित हो रही है.

महिलाओं का संघर्ष: 2 KM दूर नदी ही सहारा

गर्मी की शुरुआत के साथ ही इलाके में जल संकट गहरा गया है. जनवल गांव की महिलाओं ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उन्हें हर दिन दो किलोमीटर दूर जोरी नदी जाकर नहाना और कपड़े धोना पड़ता है. पीने के पानी के लिए भी उन्हें दूसरे टोले-मुहल्लों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. स्थानीय महिलाओं (सत्यभामा देवी, सुषमा देवी और अन्य) ने बताया कि कई बार पंचायत भवन का घेराव करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है.

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चुनाव के समय मिला ‘झूठा’ आश्वासन

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनाव के दौरान वोट बैंक की खातिर प्लांट को आनन-फानन में अस्थायी रूप से ठीक किया गया था. लेकिन चुनाव खत्म होने के मात्र 15 दिन बाद ही आपूर्ति फिर से ठप हो गई. घटिया पाइपलाइन और अधूरी योजनाओं ने ग्रामीणों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है. कई इलाकों में तो अब तक पाइपलाइन भी नहीं बिछाई गई है.

प्रशासन का रटा-रटाया जवाब

इस गंभीर समस्या पर पीएचडी विभाग के जेई अमित ठाकुर ने कहा कि प्लांट को दुरुस्त करने के लिए संबंधित संवेदक (ठेकेदार) को पत्र जारी किया गया है और जांच के निर्देश दिए गए हैं. हालांकि, ग्रामीणों (सुखदेव रजवार, देवानंद साहू और अन्य) का कहना है कि विभाग पिछले तीन सालों से केवल आश्वासन ही दे रहा है, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं दिख रहा.

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Published by: Sameer Oraon

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