लोहरदगा: अकिल एड़पा कार्यक्रम के तहत शनिवार को जिले के विभिन्न विद्यालयों में पदाधिकारियों ने पहुंचकर पठन-पाठन का जायजा लिया. इस दौरान पदाधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को पढ़ाया और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था की जानकारी ली. साथ ही विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों को परीक्षा परिणाम में सुधार के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.
कार्यक्रम के तहत उप निर्वाचन पदाधिकारी संजय कुमार ने शाहबुटी उच्च विद्यालय सेन्हा, अनुमंडल पदाधिकारी अमित कुमार ने उत्क्रमित राजकीयकृत उच्च विद्यालय आकाशी, जिला मत्स्य पदाधिकारी प्रीसेती भार्गवी एवं भंडरा बीडीओ प्रतिमा कुमारी ने प्रोजेक्ट बालिका हाई स्कूल भंडरा, सेन्हा बीडीओ संग्राम मुर्मू ने राजकीयकृत उत्क्रमित विद्यालय सिठीयो तथा नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने प्रोजेक्ट उच्च विद्यालय कुज्जी का निरीक्षण किया.
इससे पूर्व पीडी आइटीडीए सुषमा नीलम सोरेंग ने राजकीयकृत बालिका उच्च विद्यालय लोहरदगा, जिला शिक्षा पदाधिकारी दास सुनंदा चंद्रमौलेश्वर ने हाई स्कूल गगेया तथा जिला कृषि पदाधिकारी काले न खलखो ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय कुजरा सहित अन्य विद्यालयों का निरीक्षण कर विद्यार्थियों को पढ़ाया.
पठन-पाठन और उपस्थिति की ली जानकारी
निरीक्षण के दौरान पदाधिकारियों ने विद्यालयों में पठन-पाठन की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की उपस्थिति और शिक्षकों की ससमय उपस्थिति की जानकारी ली. उन्होंने निर्धारित पाठ्यक्रम को समय पर पूरा कराने तथा पढ़ाए गए विषयों की नियमित पुनरावृत्ति कराने का निर्देश दिया. लगातार अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया.
अकिल एड़पा कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक परीक्षाओं में विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत सफलता सुनिश्चित करना है. पदाधिकारियों ने कहा कि प्रत्येक माह आयोजित होने वाली परीक्षाओं के परिणामों की नियमित समीक्षा की जाए. कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को चिह्नित कर उनके लिए रिमेडियल कोचिंग एवं अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की व्यवस्था की जाए.
कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष रणनीति बनाने का निर्देश
पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों का प्रत्येक माह कम से कम दो बार टेस्ट लेने और प्राप्त परिणामों के आधार पर उनकी शैक्षणिक प्रगति में सुधार करने का निर्देश दिया. साथ ही विगत वर्षों के परीक्षा परिणामों का विषयवार विश्लेषण कर यह पता लगाने को कहा गया कि किन विषयों में विद्यार्थी अपेक्षाकृत अधिक संख्या में कमजोर या अनुत्तीर्ण हो रहे हैं.
विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों से चिह्नित कमजोर विषयों एवं विद्यार्थियों के लिए विशेष रणनीति तैयार कर शैक्षणिक सुधार करने को कहा गया. विगत वार्षिक परीक्षा में सामने आई कमियों को दूर करते हुए आगामी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कराने पर भी जोर दिया गया. नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन, निरंतर मूल्यांकन और कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराकर बेहतर परीक्षा परिणाम हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया.
