कैरो़ सरकारें बदलीं और अधिकारी भी आये-गये, लेकिन आम जनता की बुनियादी समस्याओं का समाधान सिफर ही रहा. इसका सबसे बड़ा उदाहरण कैरो प्रखंड के हनहट-मदरसा पथ पर स्थित कोयल नदी का पुल है. मनोकामना सिद्ध बाबा भोलेनाथ मंदिर के समीप बना यह पुल दो माह पूर्व टूट चुका है, जिससे हजारों लोगों की आवाजाही ठप है. यह सड़क क्षेत्र के लिए ””””लाइफलाइन”””” मानी जाती है, जिसके सहारे लोहरदगा, कुड़ू और रांची जिला (चान्हो) के दर्जनों गांवों के किसान, छात्र और मरीज मुख्य राजमार्ग तक पहुंचते हैं. 20 किलोमीटर का चक्कर लगाने को मजबूर ग्रामीण : पुल टूटने के कारण टाटी, खरता, चाल्हो और सढ़ाबे जैसे गांवों के ग्रामीणों को महज छह किलोमीटर का सफर तय करने के लिए अब 20 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. ग्रामीणों के अनुसार, कोयल नदी पर बने इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से सढ़ाबे, टाटी, खरता, चाल्हो, हुदू समेत रांची के मदरसा, पंडरी और लापुर जैसे गांवों का संपर्क कट गया है. रोजाना हजारों निजी व सवारी गाड़ियां इसी मार्ग से गुजरती थीं, जो अब बंद हैं. इलाज और व्यापार पर पड़ा बुरा असर : स्थानीय ग्रामीण सुसेन महतो, बहादुर उरांव और बजरंगी यादव सहित अन्य ने बताया कि पुल टूटने से सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को हो रही है. जिस मरीज को एक घंटे में अस्पताल पहुंचाया जा सकता था, उसे अब दो घंटे से अधिक का समय लग रहा है. किसानों को अपनी फसल बाजार तक ले जाने में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. लाखों का दैनिक कारोबार प्रभावित होने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गयी है.
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