लोहरदगा. उत्तराखंड के जोशीमठ में करीब तीन माह तक भवन निर्माण कार्य कराने के बाद मजदूरी का भुगतान नहीं करने का मामला सामने आया है. गुरुवार को सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद उरांव के नेतृत्व में प्रवासी मजदूरों ने श्रम अधीक्षक लोहरदगा से मुलाकात कर बकाया मजदूरी दिलाने की मांग की.
अच्छी मजदूरी का लालच देकर जोशीमठ ले जाने का आरोप
मजदूरों ने बताया कि दुमका के रहने वाले दो लोगों ने अच्छी दैनिक मजदूरी दिलाने का भरोसा देकर उन्हें उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ ले गये थे. वहां उन्हें आइटीबीपी की निर्माणाधीन भवन परियोजना में काम पर लगाया गया. मजदूरों के अनुसार, करीब तीन माह तक काम कराने के बाद भी उन्हें मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया.
मजदूरों ने बताया कि मजदूरी नहीं मिलने के बाद वे किसी तरह वापस लोहरदगा लौटे और अपनी समस्या लेकर श्रम अधीक्षक कार्यालय पहुंचे. उन्होंने बकाया मजदूरी दिलाने के लिए विभाग से कार्रवाई की मांग की.
बाहर जाने से पहले कंपनी की जानकारी लेने की अपील
मजदूरों ने अन्य श्रमिकों से अपील की कि किसी व्यक्ति के लालच या झांसे में आकर दूसरे राज्यों में काम करने न जाएं. बाहर जाने से पहले संबंधित फर्म या कंपनी की पूरी जानकारी, पता और रोजगार की शर्तों की जानकारी जरूर लें. उन्होंने रोजगार के लिए दूसरे राज्य जाने से पहले श्रम अधीक्षक कार्यालय में अपना निबंधन कराने की भी अपील की.
मजदूरी दिलाने का आश्वासन
श्रम अधीक्षक ने मजदूरों को आश्वस्त किया कि उनकी बकाया मजदूरी दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जायेगा. मामले में राम उरांव, नेहा उरांव, राम प्रकाश उरांव, सुषमा उरांव, लखिया उरांव, जुगेश उरांव, लीलमुनी उरांव, सुनीता उरांव, आशीष उरांव, राजकिशोर उरांव, सोनिया उरांव, बबलू उरांव और फुलमनी उरांव शामिल थे.
