गर्मी के आगमन के साथ जल संकट गहराता जा रहा है किस्को लोहरदगा. किस्को में गर्मी के आगमन के साथ जल संकट गहराता जा रहा है. नदी और तालाब अधिकांश स्थानों पर सूख चुके हैं, वहीं पंचायत और पेयजल विभाग द्वारा लगाए गए जलमीनार महीनों से खराब पड़े हैं. इनकी मरम्मत की दिशा में कोई ठोस पहल न होने से ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है. अधिकांश चापाकल भी खराब हैं, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गयी है. खरकी, देवदरिया, पाखर, बगड़ू, हिसरी, नवाडीह और बेठहठ पंचायतों में दर्जनों जलमीनार बंद हैं. सबसे अधिक कठिनाई पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में है, जहाँ जल नल योजना पूरी तरह विफल साबित हुई है. ग्रामीणों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और कई बार नदी व चुआ जैसे प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है. 2017-18 में निर्मित सौर आधारित जलमीनार पिछले पांच वर्षों से खराब पड़ा है. परहेपाठ पंचायत के सेमरटोली गांव में 2017-18 में निर्मित सौर आधारित जलमीनार पिछले पांच वर्षों से खराब पड़ा है. इससे 11 घरों को पाइपलाइन से मिलने वाला पानी बंद हो गया है. ग्रामीणों ने कई बार विभाग को शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. सरकार हर घर नल कनेक्शन की योजना चला रही है, परंतु पुराने कनेक्शन की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा. इसी तरह परहेपाठ पंचायत के हिरदे टोली, खरकी पंचायत के कोचा, पाखर पंचायत के कई गाँव, नवाडीह पंचायत के फटया टोली और बेठहठ पंचायत के आनंदपुर व लावागाई में भी जलमीनार खराब पड़े हैं. परहेपाठ पंचायत के अंतर्गत एक हजार से अधिक घरों को पानी देने वाला ट्रीटमेंट प्लांट भी वर्षों से बंद है. इन हालातों से स्पष्ट है कि विभागीय लापरवाही और पंचायत की उदासीनता के कारण ग्रामीणों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. जल संकट से निपटने के लिए जरूरी है कि पुराने जलमीनार और पाइपलाइन की मरम्मत की जाए, सौर आधारित जलमीनारों को पुनः चालू किया जाए और वर्षा जल संचयन जैसे वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा दिया जाये. तभी ग्रामीणों को स्थायी समाधान मिल सकेगा.
लो..अधिकांश जलमीनार खराब, मरम्मत नही होने से पेयजल संकट

लो..अधिकांश जलमीनार खराब, मरम्मत नही होने से पेयजल संकट
Copied link
किस्को में गर्मी के आगमन के साथ जल संकट गहराता जा रहा है.