प्रतिदिन 100 से 150 मरीज आते हैं
कर्मियों की कमी से जूझ रहा है केंद्र
भंडरा (लोहरदगा) : लोहरदगा जिला का भंडरा प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अपनी अव्यवस्था पर आंसू बहाने को विवश है. यहां चिकित्सकों के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों की घोर कमी है, लेकिन इस ओर न तो प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान है और न ही जनप्रतिनिधियों का. जनता असुविधा के कारण झोला छाप लोगों के चक्कर में पड़ कर जान गंवाने को विवश हो रहे हैं. भंडरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों का कुल स्वीकृत पद 7 हैं. इनमें मात्र तीन चिकित्सक पदस्थापित है. जिनमें डॉ. मुकुल, डॉ. अरविंद कुमार आर्य, एवं डॉ. अमित हैं.
चिकित्सको के चार पद खाली पड़े हैं. यहां एएनएम के 18 स्वीकृत पद है. इनमें आठ पद स्थापित है और 10 पद खाली पड़े हैं. यहां एलएचभी के दो स्वीकृत पद है और दोनों पद खाली पड़े हैं. ब्लॉक एक्सटेंशन एजुकेटर का एक पद है, जो खाली पड़ा है. पुरुष कल्याण कार्यकर्ता के तीन पद स्वीकृत हैं, जिनमें दो पद खाली है. हेल्थ वर्कर के तीन पद हैं, जिनमें एक कार्यरत है.
कंप्यूटर ऑपरेटर के एक पद स्वीकृत है जो खाली है. अनुसेवक के 16 पद हैं, जिनमें 10 पद रिक्त है. लैब टेक्नीशियन के एक पद खाली हैं. यहां ड्रेसर कोई नहीं है. ड्रेसर के दो पद है, जो खाली है. फार्माशिष्ट के दो पद हैं और दोनों खाली है. सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां की वास्तविक स्थिति क्या है. भंडरा प्रखंड में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन 100 से 150 मरीज आते हैं.
मालूम हो कि भंडरा प्रखंड में झोला छाप लोगों की संख्या काफी ज्यादा है. यहां के प्रभारी ने झोला छाप डॉक्टरों की सूची तैयार कर सिविल सर्जन को कार्रवाई के लिए दो महीना पहले लिखा था, लेकिन अब तक अवैध रूप से डॉक्टर बनकर घूमने वाले लोगों के खिलाफ सिविल सर्जन के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई. जबकि इस संबंध में राज्य सरकार का भी स्पष्ट निर्देश है कि झोला छाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाये. चिकित्सा प्रभारी ने सिविल सर्जन को 38 लोगों की सूची भेजी थी.
इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ मुकुल से पूछने पर उन्होंने कहा कि चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के कारण कार्य प्रभावित तो होता ही है. इसके लिए सिविल सर्जन को लिखा गया है और सिविल सर्जन द्वारा चिकित्सकों की कमी को लेकर सरकार को भी लिखा गया है.
