जानवरों के पीने के लिए भी नहीं है नदी में पानी

लोहरदगा : जिले में शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है. तपती गर्मी के कारण जलस्रोत सूख गये हैं. मनुष्य के साथ-साथ पशु-पक्षियों को भी पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है. नदियां, तालाब, कुआं, चुआं का जलस्तर पाताल में चला गया है. पानी नहीं […]

लोहरदगा : जिले में शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है. तपती गर्मी के कारण जलस्रोत सूख गये हैं. मनुष्य के साथ-साथ पशु-पक्षियों को भी पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है. नदियां, तालाब, कुआं, चुआं का जलस्तर पाताल में चला गया है. पानी नहीं मिलने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.

कुछ साल पहले तक सेन्हा नदी में सालों भर पानी भरा रहता था, लेकिन आज वहां सिर्फ रेत ही रेत नजर आती है. सेन्हा क्षेत्र के किसान इस नदी से अपने खेतों के पटवन के साथ -साथ अपने मवेशियों को भी पानी पिलाया करते थे. आज स्थिति यह है कि नदी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. नदी में पक्षियों को भी पीने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है.

किसान नदी में गड्ढा खोद कर अपने मवेशियों को पानी पिलाने को विवश हैं. जवाहर नवोदय विद्यालय जोगना में इसी नदी से पानी चढ़ा कर स्कूली विद्यार्थियों के लिए पानी की व्यवस्था की जाती थी. नदी सूख जाने के बाद विद्यार्थियों को विद्यालय परिसर में कराये गये बोरिंग से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. नदियों का जलस्रोत सूख जाने का मुख्य कारण नदियों से बालू का अंधा-धुंध उठाव बताया जाता है. इस नदी से भी अवैध तरीके से बालू का उठाव निरंतर किया जाता है.

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