अपना अस्तित्व खो रहा है भालुडूबा बांध

किस्को : किस्को प्रखंड क्षेत्र के खरकी पंचायत अंतर्गत पहाड़ों की गोद में स्थित 90 वर्ष पुराना तालाब आज अपना अस्तित्व खो चुका है. जहां क्षेत्र में एक समय पानी के लिए चर्चित तालाब था, आज मैदान में तब्दील हो गया है. बात 1928 ई. में कोचा करम टोली के भालुडुबा बांध की है. जिसका […]

किस्को : किस्को प्रखंड क्षेत्र के खरकी पंचायत अंतर्गत पहाड़ों की गोद में स्थित 90 वर्ष पुराना तालाब आज अपना अस्तित्व खो चुका है. जहां क्षेत्र में एक समय पानी के लिए चर्चित तालाब था, आज मैदान में तब्दील हो गया है. बात 1928 ई. में कोचा करम टोली के भालुडुबा बांध की है. जिसका आज पूरी तरह नामोनिशान मिट चुका है.

एक समय 12 महीना गर्मी, जाड़ा, बरसात किसी भी महीने में तालाब में पानी लबालब भरा होता था. जिसमें आज सिर्फ झाड़ी नजर आ रहा है, तालाब से लगभग 2000 किसान लाभान्वित थे, जो आज तालाब को बचाने में असमर्थ हैं. ग्रामीणों द्वारा कई तरह से तालाब बचाने को लेकर प्रयास भी किया गया. जो बेकार साबित हुआ. अगर तालाब बन जाये, तो इससे कोचा, बरनाग, खरकी के हजारों किसान लाभान्वित होंगे. बात करें तो तालाब की दूसरी ओर के खेत जो कि तालाब से गड्ढे में स्थित है, उसमें अभी भी पानी भरा हुआ है. जिससे यह पता चलता है कि तालाब में 12 महीने पानी रहता है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार 2014 में कोचा, बरनाग, करम टोली के लोगों द्वारा तालाब नहीं बनने के कारण नाराज होकर वोट बहिष्कार भी किया गया था. उपायुक्त द्वारा ग्रामीणों से तालाब निर्माण करने की बात कही गयी थी. जिसके बाद भी ग्रामीणों ने विरोध करते हुए वोट नहीं दिया था. जिसके बाद भी बांध नहीं बना है. इस संबंध में ग्रामीण सोमनाथ भगत, सुखिया उरांव, वीरेंद्र मिंज, सीताराम उरांव, राजेश उरांव, सुरेश तुरी, सुरेंद्र लोहरा का कहना है कि पाखर माइंस में अवैध डंपिंग करने के कारण भालूडूबा बांध में मिट्टी मोरम से भर गया है.

परंतु हिंडाल्को द्वारा बांध पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है, जबकी कुछ ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में पेड़ो की अंधाधुंध कटाई के कारण मिट्टी का कटाव तेजी से हो रहा है जिससे तलाब भर चुका हैं. ग्रामीणों का कहना है कि तालाब बन जाने से आसपास के कई गांवों को फायदा होगा. क्योंकि इसमें कभी पानी समाप्त ही नहीं होगा. साथ ही तालाब बन जाने से आसपास के क्षेत्र के लोगों को पानी की समस्या से भी निजात मिलेगी.

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