लोहरदगा : नगर परिषद चुनाव में आर या पार की लड़ाई में प्रत्याशियों के बीच एक दूसरे से बेहतर साबित करने के लिए वार लगातार तेज होती जा रही है. चुनाव प्रचार का वाहन सुरीले गीतों एवं लुभावने नारों के साथ गली मुहल्लों मे भ्रमण कर रहा है. आरोप प्रत्यारोपो का सिलसिला जारी है.
उम्मीदवार भी लंबे चुनाव प्रचार से अब उबने लगे हैं. कुछ लोग उम्मीदवारों से लगातार सवाल जवाब कर रहे हैं. बिजली नहीं है तो उम्मीदवारों की क्षमता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. चुनाव का माहौल है सब बर्दाश्त किया जा रहा है. वोट बैंक के दुकानदार अपनी दुकान सजा कर बैठे हैं. बता रहे हैं कि उनके पास पूरे इलाके का वोट है, वे जहां चाहेंगे वो सारा वोट वहीं पड़ेगा. जो व्यक्ति पिछले चुनाव में पांच हजार रुपये में मैनेज हुआ था. वह इस बार सीधे बोल रहा है कि सामने वाला पचास हजार दे रहा है, आप उससे ज्यादा दे सकते हैं, तो बात कीजिये, नहीं तो इस बार हमें छोड़ दीजिये. जातियों की बैठकें भी लगातार होने लगी है, उम्मीदवारों को दिखाया जा रहा है कि हम सब एक हैं. लेकिन इसके पीछे भी कुछ बात है जो सभी के सामने नहीं किया जा सकता है, सामाजिक संगठन बना कर लोग शहर के विकास को लेकर अचानक चिंतित होने लगे हैं. उम्मीदवारों को इन सब से भी मुस्कुराते हुए जूझना पड़ रहा है. कल तक जो सामने खड़े होने मे भी संकोच करते थे वे लोग आज अपने मुहल्ले में सवाल जबाब करते नजर आ रहे हैं. उम्मीदवार इस माहौल का सामना कैसे कर रहे हैं ये सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. मुहल्ले में यदि किसी की मौत हो रही है तो कई उम्मीदवार पहुंच रहे हैं. शोक व्यक्त करने के साथ-साथ लिफाफा भी पकड़ाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि गुजरने वाले उन्हें कितना मानते थे. सभी उम्मीदवार मतदाताओं को अपने अपने एजेंडे बता रहे हैं. अब लड़ाई आर पार की है. वैसे भी वोटरों को मनाने के चंद दिन ही बचे हैं. चुनाव प्रचार के साथ साथ बूथ मैनेजमेंट को लेकर भी प्रत्याशी परेशान हैं .नयी नयी रणनीति बनाने की कवायद चल रही है. जो साथ साथ चल रहे हैं वे भी इधर उधर देख रहे हैं. वैसे संदेह की दवाई तो हकीम लुकमान के पास भी नहीं थी.
