गर्मी शुरू होते पलायन करने लगते हैं किसान

कैरो(लोहरदगा) : कैरो के किसान गर्मी की शुरुआत में कंदनी नदी के सूखने चिंतित है. प्रखंड क्षेत्र के गजनी, उल्टी, खंडा, उतका कैरो, सढ़ांबे व एडादोन आदि नदी किनारे की खेतों में लगे मिर्चा, टमाटर, गेहूं, गोभी, चना, पालक, धनिया जैसे विभिन्न फसलों में समुचित सिंचाई नहीं हो रही है. किसान काफी मशक्कत कर नदी […]

कैरो(लोहरदगा) : कैरो के किसान गर्मी की शुरुआत में कंदनी नदी के सूखने चिंतित है. प्रखंड क्षेत्र के गजनी, उल्टी, खंडा, उतका कैरो, सढ़ांबे व एडादोन आदि नदी किनारे की खेतों में लगे मिर्चा, टमाटर, गेहूं, गोभी, चना, पालक, धनिया जैसे विभिन्न फसलों में समुचित सिंचाई नहीं हो रही है.
किसान काफी मशक्कत कर नदी में जेसीबी से गढ़ा खोद कर किसी तरह खेतों में पानी उपलब्ध करा पा रहे है. इनमें से अधिकांश किसान पैसे के अभाव में फसल की पटवन नहीं कर पा रहे है, जिससे खेतों में लगी फसल बर्बाद होने की कगार पर है. प्रखंड क्षेत्र में प्रत्येक साल सैकड़ों एकड़ जमीन में लोग खेती करते है.
क्षेत्र के लोग मुख्य रूप से खेती पर ही निर्भर रहते है. अगर खेतों में पटवन की समुचित व्यवस्था हो, तो यहां के लोग खेती कर आर्थिक रूप से सम्पन्न हो सकते हैं.
गांव की परिधि में प्रकृति ने नदी के माध्यम से पानी की उपलब्धता वरदान के रूप में दी है. बशर्ते नदियों के पानी को समय रहते रोकने की व्यवस्था की जाती. कैरो प्रखंड क्षेत्र के पूरब स्थित सढ़ांबे गांव के किसान खेती करते है, पर किसानों से बात करने पर किसान जगन्नाथ यादव का कहना है कि नदी में पानी रोकने का उचित व्यवस्था नहीं होने से गर्मी आते नदी व कुआं का जलस्तर नीचे चला जाता है, जिससे खेती करना मुश्किल हो गया है.
किसान मंसूर अंसारी का कहना है कि गांव के लगभग प्राय: लोग खेती किसानी पर ही निर्भर है, परंतु गर्मी के शुरू होते पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से मायूस हो जाते है. पानी के अभाव में किसान खेती नहीं कर पाने से रोजी-रोजगार की तलाश में गांव से पलायन कर दूसरे राज्य या शहर में रोजी-रोजगार की तलाश में निकल जाते है.
किसान अजय साहू का कहना है कि हमलोगों का जीवन यापन का मुख्य साधन खेती है. हमलोगों को उपहार स्वरूप कंदनी नदी मिली है, पर आज तक नदी में पानी सिंचित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हुई है. इससे किसान गर्मी शुरू होते जेसीबी लगा कर जहां गड्ढा खोदना पड़ता है या फिर पानी के लिए तरसते है और खेती करना छोड़ मजदूरी करने दूसरे राज्य चले जाते है.
किसान जैनुल अंसारी का कहना है कि गर्मी के मौसम छोड़ दे, तो पूरे माह खेतों हरियाली रहती है. लेकिन जैसे गर्मी आती है. खेत वीरान पड़ने लगते है. किसान धोनध्या उरांव का कहना है की खेती बारी कर परिवार चलाते है.
गर्मी आते कंदनी नदी व कोयल नदी के सूख जाने से हमलोगों को मजबूरन मजदूरी करने दूसरे राज्य जाना पड़ता है. इससे बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है. हमारे खेतों में लगी फसल बर्बाद होने के कगार पर है. किसान भोला उरांव का कहना है की खेतों में तीसी, सरगुजा व टमाटर की फसल लगी है. फसल को 20 दिन में एक बार मुश्किल से सिंचाई कर पाता हूं, जिससे फसल बर्बाद होने को है.
किसान लखन उरांव का कहना है कि आज हमारा प्रखंड में सढ़ांबे ग्राम खेती के लिए दूर-दूर तक जाना जाता है, पर जैसे गर्मी दस्तक देती है. गांव में किसान दिखायी नहीं देते है. इसका मुख्य वजह कंदनी नदी व कोयल नदी का सूखना है.
अगर इसमें पानी संचय करने की व्यवस्था होती, तो किसान दूसरे राज्य मजदूरी करने नहीं जाते. किसान विवेक महतो का कहना है कि मेरे पूर्वज खेती करते थे और आज मैं भी खेती करता हूं. खेती से ही अपने घर परिवार का भरण-पोषण करते है. पर गर्मी के दिनों में नदी सूखने से फसल पानी के अभाव में बर्बाद हो जाते है.

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