एड्स से सतर्कता ही बचाव है

लोहरदगा : विश्व एड्स दिवस पर इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में विचार गोष्ठी का आयोजन महिला इंटर कॉलेज के सभागार में किया गया.कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अनुमंडल पदाधिकारी सह उपाध्यक्ष इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी राज महेश्वरम ने कहा कि एड्स रोगी की पहचान पहली बार 1981 में […]

लोहरदगा : विश्व एड्स दिवस पर इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में विचार गोष्ठी का आयोजन महिला इंटर कॉलेज के सभागार में किया गया.कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अनुमंडल पदाधिकारी सह उपाध्यक्ष इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी राज महेश्वरम ने कहा कि एड्स रोगी की पहचान पहली बार 1981 में हुई थी. उसके बाद इस रोग से बचाव को लेकर कई शोध प्रारंभ किया गया. बाद में डब्ल्यूएचओ ने 1988 से विश्व एड्स दिवस मनाना शुरू किया ताकि इस बीमारी के कारणों को लोग जान सकें और बचाव कर सकें. विश्व में भारत एड्स रोगी के मामले में तीसरे स्थान पर है. देश में पहला रोगी 1996 में पता चला था. इस रोग से पीड़ित लोगों को भी जीवन जीने का अधिकार है.
इसलिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सभी रोगी के नाम को गुप्त रखा जाता है और उनके इलाज में सरकार अनुदान राशि देकर मदद करती है. प्राय: देखा जाता है कि रोजगार की तलाश में लोग बाहर जाते हैं और असुरक्षित यौन संबंध बनाने के कारण एड्स रोग के शिकार होते हैं. इससे बचने की आवश्यकता है. आइएमए की अध्यक्षत सह इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के वाइस चेयरमैन डॉ गणेश प्रसाद ने कहा कि एचआइवी एक विषाणु है जो बॉडी के इम्यून सिस्टम पर प्रहार करता है और प्रभावित व्यक्ति के शरीर में उसकी प्रतिरोधक क्षमता को दिनों-दिन कमजोर कर देता है. इससे बचाव के लिए सतर्कता ही एकमात्र उपाय है़
अर्थात असुरक्षित यौन संबंध नहीं बनाना चाहिये़ इंजेक्शन लेते समय प्रयोग किया हुआ सिरिंज का पुनः प्रयोग नहीं करना चाहिए. सोसाइटी के वाइस चेयरमैन सीताराम शर्मा ने कहा कि हम अपने दैनिक जीवन में रहन-सहन के माध्यम से भी सचेत रह सकते हैं. हमारी दिनचर्या ठीक नहीं रहेगी तो विचारों में बदलाव होगा और हम गलत कदम उठा लेंगे. हमें अपने आचरण में सुधार लाने की आवश्यकता है ताकि हम कोई भी गलत कार्य नहीं करें और परिणाम सकारात्मक रहे. इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव अरुण राम ने कहा कि एड्स रोग एचआइवी विषाणु के फैलने से होता है. हम ऐसा कोई भी कृत न करें जिससे एड्स का प्रसार हो.
अपने पार्टनर के प्रति वफादार रहें और जागरूकता से ही एड्स से बचा जा सकता है. इसजागृति को हम जितना विस्तारित करेंगे देश से एड्स रोगी की संख्या उतनी ही कम होगी. जनजागृती के माध्यम से ही एड्स मुक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं.
इस अवसर पर सोसाइटी के कोषाध्यक्ष राहुल कुमार, कार्यकारिणी सदस्य प्रोफेसर स्नेह कुमार, कुंती साहू तथा आलोक कुमार ने भी विचार व्यक्त किया. धन्यवाद ज्ञापन कार्यकारिणी सदस्य सह महाविद्यालय की प्राचार्या शमीमा खातून ने किया. मौके पर शिक्षक राज किशोर प्रसाद, बीके बड़ाईक, गीता प्रसाद, मंजू खत्री, शकुंतला कुमारी, गीता कुमारी, मधुबाला अग्रवाल, चंद्रशेखर प्रसाद चांद, प्रवीण कुमार, जगतपाल केसरी, मनीष केसरी, रुणा कुमारी, सतीश शाहदेव सहित महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित थीं.

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