साथ ही साथ इन कार्यक्रम के आयोजन द्वारा यह प्रयास किया गया है कि पिछड़े और गरीब आदिवासी वर्ग के लोगों में जो कुछ भी गलत फहमियां व्याप्त है उनको मिटाया जा सके. ऐसी अपेक्षा की जाती है कि सांस्कृतिक आदान प्रदान के माध्यम से युवक युवती अपनी प्रतिभा एवं व्यक्तित्व का विकास कर राष्ट्र निर्माण में एवं अपने क्षेत्र के विकास में सहयोग करने में सक्षम होंगे.
इस कार्यक्रम के तहत झारखंड, छत्तीसगढ़ एवं ओड़िसा के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र से लगभग दो हजार आदिवासी युवक युवतियों को चयनित कर देश के दस मुख्य शहरों में एक सप्ताह के लिए भ्रमण के लिए भेजा रहा है. सीआरपीएफ 158 बटालियन ने नेहरू युवा केंद्र के सहयोग से जिले से 70 आदिवासी युवक युवतियों को चयनित कर चार टीम बनाकर सूरत, चेन्नई, मुंबई एवं बेंगलुरू के लिए भेजा जा रहा है. इन शहरों में भ्रमण कर इन युवक युवतियों को वहां की संस्कृति, विकास, व्यवस्था और पर्यटन स्थल देखने का मौका मिलेगा. साथ ही वहां के लोगों से मिलने जुलने एवं एक दूसरे को जानने समझने का अवसर भी मिलेगा.
इसी क्रम में सूरत के लिए प्रथम टीम भेजी गयी. टीम को रवाना करने से पूर्व सीआरपीएफ 158 बटालियन के कमांडेंट मनोज गुप्ता ने युवक युवतियों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि दूसरी टीम नवंबर में चेन्नई एवं तीसरी टीम को मुंबई तथा दिसंबर माह में चौथी टीम बेंगलुरू के लिए रवाना किया जायेगा. मौके पर सीआरपीएफ के द्वितीय कमांडेंट राजेश चौहान, आरवी फिलिप, उप कमांडेंट अमरेंद्र तिवारी, नेहरू युवा केंद्र की समन्वयक ललिता कुमार सहित सीआरपीएफ के जवान मौजूद थे.
