छिपादोहर से हेहेगढ़ा तक रेल लाइन बिछाने काम नहीं हुआ शुरू

सोन नगर-पतरातू तीसरी लाइन परियोजना के तहत पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की कोर एरिया से रेलवे लाइन को डायवर्ट करने और पांच वर्ष से अधिक समय तक काम रोके जाने के बाद वित्तीय भार बढ़ गया है.

पीटीआर के कोर एरिया से रेलवे लाइन को डायवर्ट करने और देरी के कारण बढ़ गया वित्तीय बोझ, मामला अब रेलवे बोर्ड में है लंबित

पहले से दो लाइन इस क्षेत्र से गुजरती है

तीसरी लाइन शुरू होने पर वन विभाग ने आपत्ति जतायी

तसवीर-21 लेट-9 छिपादोहर तक बिछाये गये रेलवे लाइन

संतोष कुमार.

बेतला. सोन नगर-पतरातू तीसरी लाइन परियोजना के तहत पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की कोर एरिया से रेलवे लाइन को डायवर्ट करने और पांच वर्ष से अधिक समय तक काम रोके जाने के बाद वित्तीय भार बढ़ गया है. इस कारण छिपादोहर से हेहेगढ़ा तक करीब 14 किमी तक रेल लाइन बिछाने काम अबतक शुरू नहीं हो सका है. मामला रेलवे बोर्ड के पास लंबित है.उम्मीद है बहुत जल्द इसका निदान निकाला जायेगा और रेलवे विकास निगम लिमिटेड के द्वारा काम पूरा कर लिया जायेगा.वन विभाग के द्वारा आपत्ति दर्ज कराने के बाद पिछले वर्ष केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और रेलवे मंत्रालय के वरीय अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय संयुक्त बैठक हुई थी. जिसमें पीटीआर में गुजरने वाली 11 किलोमीटर तक रेल लाइन को डायवर्ट करने की सहमति बनी है.

ज्ञात हो कि छह वर्ष पूर्व सोननगर से पतरातू तक बिछाये जाने वाले रेलवे लाइन पर छिपादोहर और हेहेगडढ़ा स्टेशन के बीच रेल लाइन बिछाने के लिए रेलवे विकास निगम लिमिटेड ने पीटीआर प्रबंधन से एनओसी मांगी थी, जिस पर वन प्रबंधन ने थर्ड रेल लाइन के साथ ही पूर्व से मौजूद दोनों रेल लाइनों से वन एवं वन्यजीवों के बुरी तरह से प्रभावित होने का हवाला देकर आपत्ति दर्ज करायी थी. जिसके बाद जिसके बाद मामला नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड में पहुंचा, जहां थर्ड लाइन के साथ-साथ पहले से बिछे हुए दो रेल लाइन को डायवर्ट करने को कहा गया. पलामू टाइगर रिजर्व और रेलवे विकास निगम लिमिटेड ने संयुक्त रूप से रेल लाइन डायवर्ट करने को लेकर सर्वे भी किया गया था. सभी तरह की रिपोर्ट और कुछ शर्तों के आधार पर पीटीआर प्रबंधन ने रेलवे बोर्ड को भेजा है .

पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने छिपादोहर रेलवे स्टेशन से रेल लाइन डायवर्ट करने को कहा है. डायवर्ट करने के बाद यह दूरी 14 किलोमीटर की हो जायेगी और यह रेल लाइन पलामू टाइगर रिजर्व के बाहरी हिस्से से होकर गुजरेगी. पिछले पांच वर्षों तक काम रोकने और दूरी बढ़ाने के साथ अन्य स्ट्रक्चर वर्क के बढ़ोतरी के कारण एजेंसी का वित्तीय भार बढ़ गया है. जिसकी सहमति के लिए रेलवे में मामला लंबित है. वैसे अधिकारियों की मानें तो जल्द ही इसका समाधान कर लिया जायेगा और रेलवे लाइन बिछाने का काम इस वर्ष पूरा कर लिया जायेगा.

कभी वन विभाग, तो कभी रेलवे के कारण लटका रहा मामला

रेलवे लाइन बिछाने काम कभी वन विभाग तो कभी रेलवे बोर्ड के कारण पूरा नहीं हो सका है. नतीजतन छिपादोहर से हेहेगढ़ा तक रेलवे लाइन बिछाने काम करीब छह वर्षों से लटका हुआ है. फिलहाल यह मामला रेलवे बोर्ड के कारण रुका है. छह वर्ष पहले जब रेलवे लाइन बिछाने का काम शुरू किया गया था तब पलामू टाइगर रिजर्व के जंगली जानवरों के नुकसान पहुंचने का हवाला देकर पीटीआर प्रबंधन द्वारा काम को रोक दिया गया था . लेकिन अब वन विभाग के द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया गया है.सहमति के बाद अब पीटीआर के कोर एरिया से होकर गुजरने वाली रेल लाइन छिपादोहर और हेहेगढ़ा के बीच बफर एरिया से होकर गुजरेगी.वहीं मार्ग में पड़ने वाली नदियों में पुल निर्माण , टनल का निर्माण कराया जायेगा. वहीं इससे दोनों स्टेशन के बीच की दूरी करीब तीन किमी बढ़कर अब 11 से 14 किमी हो जायेगी .कोर एरिया से गुजरते तीनों रेल लाइनों को डायवर्ट कर दिये जाने के बाद वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण-संवर्धन और रेल के परिचालन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. डायवर्ट होने के बाद तीनों रेल लाइन बफर एरिया से होकर गुजरेगी जिससे वन्यजीवों के क्षति होने की संभावना नहीं के बराबर रहेगी.

क्या कहते हैं डिप्टी डायरेक्टर:

डिप्टी डायरेक्टर प्रजेशकांत जेना ने कहा कि रेल रेल लाइन बिछाने के लिए रिपोर्ट को रेलवे बोर्ड को भेज दिया है. अब जो भी करना है रेलवे को ही करना है. वन्यजीव को लेकर जो भी इंटरवेंशन है उसे वन विभाग के द्वारा पूरा किया जायेगा.

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Author: VIKASH NATH

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