कुटमू में सरहुल पूजा पर की गयी गांव गम्हेल और दुर्जाग्नि की पूजा

ग्राम देवता और प्रकृति की पूजा को समर्पित सरहुल पूजा बेतला के कुटमू में पारंपरिक तरीके से मनाया गया.

बुधवार को लोगों ने तीन बजे पूजा के बाद चूल्हा जलाया और पानी भरने का काम शुरू किया गया.

तसवीर-21 लेट-10 मांदर थाप पर झूमते गांव के लोग

बेतला. ग्राम देवता और प्रकृति की पूजा को समर्पित सरहुल पूजा बेतला के कुटमू में पारंपरिक तरीके से मनाया गया. ग्राम प्रधान रामचरित्र सिंह और कुटुम गांव के बैगा द्वारा गांव के धरतीबर माड़र में गांव गम्हेल और दुर्जाग्नि की पूजा अर्चना की गयी. इस दौरान लोग मांदर के पारंपरिक धुन पर नाचते गाते रहे. सरहुल को लेकर इसके पूर्व संध्या पर मंगलवार की शाम ढोल बजाकर गांव के प्रत्येक टोला में बुधवार को सरहुल पूजा के बारे में लोगों को जानकारी दी गयी थी. बुधवार को लोगों ने अपने घर में चूल्हे को नहीं जलाया. साथ ही किसी चापानल अथवा कुआं पर पानी भी नहीं भरा. इस कारण कुटमू मोड़ पर भी वीरानी छाई रही. दोपहर तीन बजे पूजा अर्चना संपन्न होने के बाद चूल्हा जलाया गया और पानी भरने का काम शुरू किया गया. ज्ञात हो कि इन दिनों जेठ महीने के कृष्ण पक्ष में अलग-अलग गांवों में अलग-अलग दिन लोग सरहुल मनाते हैं. पूजा को लेकर लोगों में काफी आस्था होती है. गांव के सभी सदस्य माड़र तक पहुंचते हैं और सरहूल पूजा को पारंपरिक तरीके से मनाते हैं. इस दौरान लोगों ने बताया कि सरहुल पूजा प्रकृति की पूजा का संदेश देती है. पूजा के माध्यम से जल, जंगल, जमीन के महत्व को समझने का प्रयास किया जाता है. साथ ही इसकी रक्षा का संकल्प भी लिया जाता है. साथ ही पूरे गांव के हरेक जाति के लोगों को जोड़ने का भी काम करता है.

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Author: VIKASH NATH

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