सरकारी स्कूलों की सच्चाई: जनसुनवाई में गूंजे ग्रामीणों के सवाल और चिंता की आवाज़ें

जिले के मनिका प्रखंड में शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम ने सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत को सामने ला दिया.

मध्याह्न भोजन के बाद बंद हो जाती है पढ़ाई

तसवीर-27 लेट-4 उपस्थित ज्यां द्रेंज, लेट-5 पोस्टर दिखाते बच्चे व अभिभावक

लातेहार. जिले के मनिका प्रखंड में शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम ने सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत को सामने ला दिया. यह जनसुनवाई 40 एकल शिक्षक विद्यालयों पर आधारित एक सर्वेक्षण के निष्कर्षों को लेकर रखी गयी थी, जिसमें काफी संख्या में ग्रामीण अभिभावकों ने भाग लिया और अपने बच्चों की शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को खुलकर साझा किया. अम्वाटीकर की सालमानी देवी ने बताया कि स्कूलों में जैसे ही मध्याह्न भोजन दिया जाता है, उसके तुरंत बाद पढ़ाई बंद कर दी जाती है. जब उन्होंने अधिकारियों से इस विषय में पूछा, तो जवाब मिला कि “गांव के बच्चे क्या पढ़ेंगे।” जमुना गांव की चिंता देवी ने कहा कि उनके स्कूल में सिर्फ दो शिक्षक हैं, जिनमें एक हमेशा अनुपस्थित रहते हैं और दूसरा कार्यालयी कार्यों में व्यस्त रहते हैं. चतरा की फुलिया देवी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना की विफलता पर चिंता जतायी और कहा कि इस योजना का गांव में कोई प्रभाव नहीं दिखता. करमाही गांव की कविता देवी ने अपने बच्चों के भविष्य को लेकर कहा कि वह नहीं चाहती कि उनके बच्चे भी उनकी तरह दिहाड़ी मजदूर बनें. गीता देवी ने कहा कि लोग स्कूल में क्या खाना मिला यह तो पूछते हैं, लेकिन यह कोई नहीं पूछता कि बच्चों को पढ़ाया क्या गया.

जनसुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के आरोप भी खुले तौर पर सामने आये. करमाही गांव की स्कूल प्रबंधन समिति की सदस्य कुंती देवी ने बताया कि स्कूल में नियमित बैठकों का अभाव है, मध्याह्न भोजन सही तरीके से नहीं दिया जाता, और प्रधानाध्यापक ने बच्चों को यूनिफॉर्म देने के बदले 150 रुपये की मांग की है. कई अभिभावक पैसे न दे पाने के कारण अपने बच्चों के लिए यूनिफॉर्म नहीं ले पाये. जब इन समस्याओं को प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीइइओ) राजश्री पुरी के समक्ष रखा गया, तो उन्होंने सुझाव दिया कि गांव का कोई इंटरमीडिएट पास व्यक्ति, चाहे उसे वेतन न मिले, बच्चों को पढ़ा सकता है. इस पर आईआईटी दिल्ली की प्रोफेसर रीतिका खेड़ा ने तुरंत सवाल उठाया क्या आप अपने बच्चों को ऐसे शिक्षक से पढ़ाना चाहेंगी? जिस पर अधिकारी का जवाब ””””नहीं”””” में था।

अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता जया द्रेंज ने कहा कि यदि सरकार उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 26,000 शिक्षकों की नियुक्ति कर देती है, तो इन समस्याओं का समाधान संभव है. उन्होंने कहा कि आरटीइ कानून के अनुसार अभी भी राज्य में शिक्षकों की भारी कमी है. इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट के प्रो. कुमार राणा ने कहा कि पूरे स्कूल को केवल एक शिक्षक के भरोसे चलाना न केवल चौंकाने वाला, बल्कि गैरकानूनी है यह जनता के साथ धोखा है.

कार्यक्रम का संचालन नरेगा वॉच के जेम्स हेरेंज ने किया. जनसुनवाई में बच्चों ने शिक्षा से जुड़े पोस्टर दिखाये और बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी बात रखने के लिए उपस्थित रहींं.

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Author: VIKASH NATH

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