पलामू. झारखंड का गौरव कहे जाने वाला पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) केवल बाघों और दूसरे वन्यजीवों के लिए ही खास नहीं है, बल्कि यह रंग-बिरंगे और दुर्लभ पक्षियों का भी बड़ा ठिकाना है. हाल में हुए विभिन्न सर्वेक्षणों और बर्ड वाचिंग से जुड़े लोगों के अनुसार, पीटीआर के घने जंगलों, जलाशयों और पहाड़ियों के बीच 200 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों का बसेरा पाया गया है.
आ रहे प्रवासी मेहमान
इनमें कई दुर्लभ प्रजातियां भी शामिल हैं. वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पलामू का शांत वातावरण और प्राकृतिक आवास पक्षियों के लिए अनुकूल है. सर्दियों के मौसम में साइबेरिया और दूसरे ठंडे देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या भी बढ़ जाती है. वहीं, स्थानीय पक्षियों की कई प्रजातियां यहां के पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
कई पक्षी हैं आकर्षण का केंद्र
पीटीआर में मोर, तीतर, लाल जंगली मुर्गा, उल्लू, बब्लर, दर्जी पक्षी, लाल पेट वाली बुलबुल, नीले गले वाली बारबेट, धूसर बगुला, जलमोर, शिकारी बाज, दूधराज, धनेश और विभिन्न प्रजातियों की कोयल देखी जा सकती हैं. इसके अलावा मालाबार पाइड हॉर्नबिल, ओरिएंटल पाइड हॉर्नबिल, कई तरह के किंगफिशर, कठफोड़वा, पेंटेड स्टॉर्क और बाज-चील की विभिन्न प्रजातियां भी यहां पायी जाती हैं. इन पक्षियों की मौजूदगी पीटीआर को बर्ड वाचिंग के लिहाज से खास बनाती है.
कमलदह झील प्रवासी और जलीय पक्षियों का ठिकाना
बेतला नेशनल पार्क के मुख्य द्वार से करीब छह किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक कमलदह झील पक्षी प्रेमियों के लिए खास आकर्षण है. चेरो राजवंश के राजाओं द्वारा बनायी गयी इस झील में लाल और सफेद कमल के फूलों के बीच प्रवासी पक्षियों की आवाजाही देखने को मिलती है.
पहली बार दुर्लभ लिटिल रिंग्ड प्लोवर
यहां रोजी पेलिकन, लेसर व्हिसलिंग डक, नॉर्दर्न पिनटेल, गैडवॉल, यूरेशियन मूरहेन और अन्य जलीय पक्षी बड़ी संख्या में देखे जाते हैं. हाल ही में यहां पहली बार दुर्लभ लिटिल रिंग्ड प्लोवर देखे जाने की जानकारी सामने आयी. पर्यटकों द्वारा देखे गये 'दो चोंच वाले धनेश' ने भी लोगों का ध्यान खींचा है.
जंगलों के बीच पक्षियों की चहचहाहट
पीटीआर के अंतर्गत आने वाला बेतला नेशनल पार्क भी पक्षी प्रेमियों के लिए खास जगह है. घने जंगल और झुरमुटों के बीच यहां कई दुर्लभ स्थलीय और शिकारी पक्षी देखे जा सकते हैं. सफारी के दौरान ओरिएंटल पाइड हॉर्नबिल, दुर्लभ फॉरेस्ट आउलेट, रेड जंगल फाउल, ब्लैक इबिस, क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल और अलग-अलग रंगों के किंगफिशर देखने को मिलते हैं. सफारी के दौरान जंगली हाथी, बाइसन यानी गौर, चीतल और लंगूरों के झुंड भी पर्यटकों का रोमांच बढ़ाते हैं.
पलामू किला भी पक्षियों और चमगादड़ों का ठिकाना
औरंगा नदी के किनारे स्थित चेरो राजाओं के दो प्राचीन किले ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं. इन किलों की पुरानी प्राचीरों, दीवारों और झरोखों में कई पक्षियों और चमगादड़ों ने अपना बसेरा बना रखा है. किलों की पुरानी संरचनाओं के बीच इन जीवों को देखना पर्यटकों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों के लिए खास अनुभव होता है.
नदी किनारे दिखती हैं अनोखी प्रजातियां
सुगा बांध जलप्रपात के आसपास चट्टानों के बीच बहती कोयल नदी का मनोरम दृश्य देखने को मिलता है. यहां के पथरीले और शांत इलाकों में नदी किनारे रहने वाले पक्षियों की कई प्रजातियां देखी जा सकती हैं. प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह स्थान पिकनिक मनाने और प्रकृति का आनंद लेने वाले पर्यटकों के बीच भी लोकप्रिय है.
बर्ड टूरिज्म को बढ़ावा देने की तैयारी
पीटीआर में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाये जा रहे हैं. बेतला और आसपास के जंगलों में वन्यजीवों और पक्षियों को सुरक्षित दूरी से देखने के लिए पांच आधुनिक वॉच टावर बनाये गये हैं. वन विभाग स्थानीय युवाओं को 'बर्ड गाइड' के रूप में प्रशिक्षित कर रहा है. जंगलों में विशेष नेचर ट्रेल्स भी तैयार किये जा रहे हैं, ताकि पर्यटक पक्षियों को बिना परेशान किये उन्हें करीब से देख सकें.
पक्षी जंगल के पर्यावरण को बनाते हैं मजबूत
पीटीआर में मौजूद कोयल, औरंगा और बूढ़ा नदी समेत कई छोटे-बड़े जलाशय पक्षियों के लिए पानी और भोजन का महत्वपूर्ण स्रोत हैं. पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में पक्षियों की मौजूदगी वहां के पारिस्थितिक तंत्र के स्वस्थ होने का संकेत देती है. पक्षी कीट-पतंगों की संख्या नियंत्रित करने के साथ पेड़ों और पौधों के बीजों को फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इससे जंगल के प्राकृतिक विस्तार में मदद मिलती है.
ये भी पढ़ें: कौन थे सुदिव्य कुमार सोनू? चुनाव से लेकर छात्र आंदोलन तक, हर मोर्चे पर JMM के लिए बने 'संकटमोचक'
बर्ड टूरिज्म की बड़ी संभावनाएं
पीटीआर में पक्षियों की इतनी बड़ी विविधता को देखते हुए बर्ड टूरिज्म की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा दूसरे देशों से भी बर्ड वाचर्स और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स यहां पहुंचते हैं. वन विभाग पर्यटकों के लिए विशेष बर्ड वाचिंग ट्रेल्स और प्रशिक्षित गाइडों की व्यवस्था को और बेहतर करने की दिशा में काम कर रहा है.
ये भी पढ़ें: लातेहार: फसल और घर बचाने को लगायी करंट वाली बाड़, चपेट में आकर जंगली हाथी की मौत
पक्षियों के संरक्षण पर भी जोर
पीटीआर के उपनिदेशक प्रजेश कांत जेना ने कहा कि विभाग का ध्यान केवल बड़े वन्यजीवों के संरक्षण तक सीमित नहीं है. पक्षियों की इस खूबसूरत दुनिया को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि जलाशयों की सुरक्षा और जंगल के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए लगातार गश्त और निगरानी की जा रही है. स्थानीय ग्रामीणों से भी पक्षियों के शिकार और उनके घोंसलों को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील की जा रही है, ताकि पलामू की यह प्राकृतिक और रंग-बिरंगी विरासत सुरक्षित रह सके.
