बेतला से संतोष कुमार की रिपोर्ट
पलामू टाइगर रिजर्व को सुरक्षित रखने और वन्यजीवों को ट्रेनों की चपेट में आने से बचाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है. रेल मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत रेल विकास निगम (RVNL) ने भारत सरकार के ‘परिवेश’ पोर्टल पर मौजूदा रेलवे लाइन को कोर जोन से बाहर एक वैकल्पिक मार्ग (अलाइनमेंट) पर स्थानांतरित करने का विस्तृत प्रस्ताव आधिकारिक तौर पर प्रस्तुत कर दिया है.
यह परियोजना पलामू टाइगर रिजर्व के बाघों, हाथियों और अन्य महत्वपूर्ण वन्यजीवों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. इससे वन्यजीवों की आबादी को बढ़ने का मौका मिलेगा. पूरे मामले की जानकारी पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने दी है.
हेहेगरा और छिपादोहर स्टेशन नहीं होंगे बंद
हेहेगरा और छिपादोहर रेलवे स्टेशनों को बंद या ध्वस्त किये जाने की खबरों को रेलवे ने निराधार बताया है. यात्रियों की सुविधा के लिए मौजूदा स्थानों से मात्र 500 मीटर की दूरी पर नये और अपग्रेडेड रेलवे स्टेशन बनाये जायेंगे.
इन स्टेशनों में आधुनिक यात्री सुविधाएं, उन्नत प्रतीक्षालय और बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी. क्षेत्रीय विकास और आम जनता की मांग को देखते हुए PTR प्रबंधन के विशेष अनुरोध पर रेलवे विभाग ने इस रूट पर एक अतिरिक्त रेलवे स्टेशन बनाने की मांग को भी मंजूरी दी है.
बेतला के चिकन नेक कॉरिडोर में बनेगी हाई-टेक सुरंग
परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी हिस्सा बेतला के पास स्थित संवेदनशील ‘चिकन नेक’ वन्यजीव गलियारे से होकर गुजरेगा. हाथियों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून की देखरेख और तकनीकी मार्गदर्शन में हाई-टेक सुरंग का निर्माण किया जायेगा.
जमीन के ऊपर नहीं होगी खुदाई, जंगल रहेगा सुरक्षित
आधुनिक टनलिंग पद्धति से जमीन के ऊपर कोई खुदाई या निर्माण नहीं होगा. इससे जंगल का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा. हाथियों और बाघों के पारंपरिक कॉरिडोर में वन्यजीव बिना किसी रुकावट के आवाजाही कर सकेंगे.
इसके अलावा आसपास के ग्रामीण इलाकों और इंसानी बस्तियों को बिना विस्थापित किये रेलवे को नीचे से गुजारा जायेगा.
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का मिला समर्थन
पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने रेलवे बोर्ड की इस पर्यावरण-अनुकूल पहल का स्वागत किया है. श्री जेना ने बताया कि व्यापक और संशोधित योजना तैयार करने में स्थानीय ग्रामीणों, आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों सहित क्षेत्र के सांसद और विधायकों का सक्रिय सहयोग और पूरा समर्थन मिला है.
एक स्थानीय ग्रामीण ने कहा, "यह बहुत अच्छी बात है कि हमारे जंगल और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाए बिना विकास का काम हो रहा है." एक अन्य ग्रामीण ने कहा, "हमें उम्मीद है कि इससे हमारे इलाके में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे."
उन्होंने कहा कि यह योजना इस बात का उदाहरण है कि वन्यजीवों के संरक्षण की कीमत चुकाये बिना स्थानीय समुदायों के लिए सामाजिक-आर्थिक विकास के रास्ते खोले जा सकते हैं.
अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील
रेल प्रशासन ने स्थानीय निवासियों से किसी भी तरह की अप्रामाणिक अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और क्षेत्र के विकास में भागीदार बनने की अपील की है.
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