चंदवा: जल-जंगल-जमीन और खनिज संपदा से जुड़े अधिकारों की रक्षा को लेकर झामुमो का जागरूकता अभियान शनिवार को भी जारी रहा. पार्टी कार्यकर्ताओं ने सांसग पंचायत के सोस और बुल्हु तथा सेरक पंचायत के रूद गांव में ग्रामीणों के साथ बैठक कर एमएमडीआर संशोधन विधेयक के प्रावधानों और इसके संभावित प्रभावों की जानकारी दी.
अभियान के दौरान झामुमो नेताओं ने कहा कि झारखंड के जल-जंगल-जमीन के साथ प्राकृतिक और खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकारों की रक्षा जरूरी है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संशोधन विधेयक वापस नहीं लिये जाने की स्थिति में राज्य के हित, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका है.
जनकल्याणकारी योजनाओं पर असर की जतायी आशंका
झामुमो युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष अंकित तिवारी ने कहा कि संशोधन विधेयक के प्रावधानों का असर भविष्य में राज्य की विभिन्न योजनाओं पर पड़ सकता है. उन्होंने मंईयां सम्मान योजना, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, कृषि ऋण माफी, अबुआ आवास, सर्वजन पेंशन और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए ग्रामीणों को इसके संभावित प्रभावों के प्रति जागरूक किया.
मो सरफराज ने ग्रामीणों से अपने अधिकार, सम्मान और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की. उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना जरूरी है.
मौके पर झामुमो प्रखंड सचिव रोबिन उरांव, राजेंद्र भगत, इसराफिल अंसारी, जाफिर अंसारी, सुनील गंझू, अख्तर अंसारी, सधन उरांव समेत कई पार्टी कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद थे.
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