मांगुर बनी झारखंड की राजकीय मछली, संरक्षण और उत्पादन को मिलेगी गति

मांगुर बनी झारखंड की राजकीय मछली, संरक्षण और उत्पादन को मिलेगी गति

लातेहार ़ जिले में मछली पालन को बेहतर बनाने के लिए विभाग ने कई योजनाएं तैयार की हैं. मछली उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से जिले के मत्स्य कृषकों को आंध्र प्रदेश के इल्लूरु में आयोजित प्रशिक्षण सह अध्ययन यात्रा पर भेजा गया है. मत्स्य विभाग के पदाधिकारी रणविजय ने बताया कि मत्स्य निदेशालय रांची द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों से कुल 15 चयनित मत्स्य कृषकों का दल इल्लूरु रवाना किया गया है. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश का इल्लूरु क्षेत्र देश में मछली उत्पादन और आधुनिक मत्स्य तकनीक के लिए जाना जाता है. यहां मत्स्य कृषकों को तकनीकी एवं वैज्ञानिक पद्धति से किये जा रहे उन्नत मछली पालन कार्यों का अवलोकन कराया जा रहा है. प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को आधुनिक हैचरी प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण चारा निर्माण, जल गुणवत्ता परीक्षण, रोग नियंत्रण तकनीक और उत्पादन बढ़ाने की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी गयी है. प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटने के बाद विभागीय कर्मियों द्वारा जिला स्तर पर अन्य मत्स्य पालकों को भी इन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जायेगा. इससे जिले में मछली उत्पादन बढ़ाने, वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने और मत्स्य किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने में सहयोग मिलेगा. इस वर्ष जिले में अत्यधिक बारिश से मछली उत्पादन में वृद्धि की भी संभावना है. जिले के मछली पालकों में खुशी : झारखंड सरकार द्वारा मांगुर मछली को राजकीय मछली का दर्जा दिया गया है. इससे जिले के मछली पालकों में खुशी है. लंबे समय से उपेक्षित मांगुर मछली का अस्तित्व घटता जा रहा था और इसकी प्रजातियों की संख्या में लगातार कमी देखी जा रही थी. अब राजकीय दर्जा मिलने से इसके संरक्षण, संवर्द्धन तथा बड़े स्तर पर उत्पादन का मार्ग प्रशस्त होगा. जिससे मछली पालकों की आय में वृद्धि होने की संभावना है.

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Published by: Shailesh ambashtha

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