चंदवा,लातेहार : जब प्रशासनिक व्यवस्थाएं फेल हो गईं, तो प्रखंड के हुटाप पंचायत अंतर्गत जिलिंग गांव के ग्रामीणों ने श्रमदान से बांस का अस्थायी पुल बनाकर यातायात सुगम किया. जिलिंग गांव एनएच-75 में जिलिंग मोड़ से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित है. यहां तक पहुंच पथ काफी जर्जर है.
एक साल भी नहीं टिक पायी थी पुलिया
स्थानीय ग्रामीण चमर गंझू, जोगेंद्र गंझू, सुरेंद्र गंझू, नारायन गंझू, अमरदीप गंझू, जीतू गंझू, नागेश्वर गंझू, जोगेश्वर गंझू, कृष्णा गंझू, मंगलदेव गंझू, देवमोहन गंझू, प्रदीप गंझू, दीपक गंझू, सुबोध गंझू और सतबीर गंझू समेत अन्य ने बताया कि जिलिंग गांव से लरबदखाड़ टोला तक पहुंच पथ का घोर अभाव है.
इस पथ पर कुछ वर्ष पहले सरकार की पहल पर एक पुलिया का निर्माण कराया गया था, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि पुलिया एक वर्ष भी नहीं टिक पायी. बारिश के दौरान आयी बाढ़ में यह पुलिया बह गयी. इसके बाद गांव के लोगों को आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था.
बारिश में टापू बन जाता है टोला
ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दिनों में लरबरखांड़ टोला पूरी तरह टापू बन जाता है. पुल नहीं रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई, कृषि कार्य और मरीजों को अस्पताल तक लाने में गंभीर समस्याएं हो रही थीं.
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं की गयी. आखिरकार लोगों ने आपसी सहयोग और श्रमदान से बांस का अस्थायी पुल बना लिया.
स्थायी पुलिया निर्माण की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि यह पुलिया अस्थायी समाधान है. बरसात में इसकी मजबूती को लेकर चिंता बनी हुई है. उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द यहां स्थायी पुलिया निर्माण कराने की मांग की है.
