शौर्य प्रशिक्षण के दौरान दुर्गा वाहिनी की जानकारी दी गयी

जिला मुख्यालय में संचालित सरस्वती विद्या मंदिर में झारखंड स्तरीय शौर्य प्रशिक्षण वर्ग के चौथे दिन दुर्गा वाहिनी विषय पर युवतियों को प्रशिक्षण दिया गया.

तसवीर-5 लेट-13 प्रशिक्षण लेती युवतियां लातेहार. जिला मुख्यालय में संचालित सरस्वती विद्या मंदिर में झारखंड स्तरीय शौर्य प्रशिक्षण वर्ग के चौथे दिन दुर्गा वाहिनी विषय पर युवतियों को प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए दुर्गा वाहिनी के प्रांत सह संयोजिका कीर्ति सिंह ने कहा कि दुर्गा वाहिनी को समझना आवश्यक है. दुर्गा वाहिनी एक अनुपम संगठन है जिसे महिलाओं द्वारा चलाया जाता है. जिसका संचालन विश्व हिंदू परिषद करता है. उन्होंने कहा कि दुर्गा हमारी मां है एवं दुर्गा शक्ति का स्वरूप है तो हमें शक्ति के स्वरूप को उजागर करना है. उन्होंने कहा कि शक्ति केवल शौर्य दिखाना ही नहीं, बल्कि अलग कई रूपों में दिखाना है. दुर्गा दसरूपा है. भारत की गौरव शाली इतिहास में भी महिलाओं का योगदान है. उन्होंने कहा कि बहनों के लिए भी एक संगठन बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बहनों को भी आत्मरक्षा के लिए तैयार करना होगा. उन्होंने कहा कि 15 नवंबर को दुर्गा वाहिनी का स्वरूप तैयार हो गया है. जिसमें एक संयोजिका जो दुर्गा वाहिनी के आयान के रूप में काम करेगी. उन्होंने कहा कि 7 मई 1987 को साध्वी ऋतंभरा को सर्वसम्मति से दुर्गा वाहिनी का पहला संयोजिका बनाया गया था. शौर्य प्रशिक्षण के दौरान युवतियों ने सशक्त रहने के लिए संकल्प लिया. मौके पर रामनाथ अग्रवाल, संजय तिवारी, श्याम अग्रवाल, कंचन कुमारी, कुमारी सुधा, मंजु सिंह व कुमारी जया समेत कई युवतियां उपस्थित थी.

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Author: VIKASH NATH

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