डुमारो व माल्हन में सखुआ पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, वन विभाग मौन

डुमारो व माल्हन में सखुआ पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, वन विभाग मौन

चंदवा़ चंदवा वन क्षेत्र अंतर्गत डुमारो और माल्हन पंचायत की सीमा पर इन दिनों कीमती इमारती लकड़ियों की अंधाधुंध कटाई और तस्करी का काला खेल धड़ल्ले से जारी है. वन माफिया बेखौफ होकर सखुआ के विशालकाय पेड़ों को कटर मशीन के जरिये काट रहे हैं. ग्रामीण सूत्रों के मुताबिक, माफिया पहले पेड़ों को काटकर दो-तीन दिनों के लिए छोड़ देते हैं. स्थिति सामान्य रहने पर मौका पाकर उनके बोटे (टुकड़े) बनाये जाते हैं. इसके बाद इन प्रतिबंधित लकड़ियों को स्थानीय आरा मिलों में चिराई कर या सीधे पिकअप वाहनों और ट्रेनों के जरिये दूसरे जिलों में खपाया जा रहा है. चार दिन पूर्व ही निंद्रा रेलवे स्टेशन से एक ट्रेन के जरिये भारी मात्रा में सखुआ का बोटा लोड कर पतरातू भेजे जाने की बात सामने आयी है. वन भूमि कब्जाने का चल रहा खेल : इस पूरे गोरखधंधे के पीछे सिर्फ लकड़ी तस्करी ही नहीं, बल्कि वन भूमि को कब्जाने का एक बड़ा षड्यंत्र भी काम कर रहा है. माफिया जिन स्थानों से पेड़ों को साफ कर रहे हैं, उस खाली जमीन पर खेती शुरू कर अवैध कब्जे की तैयारी की जा रही है. हालांकि, चार दिन पूर्व चंदवा पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 14 पीस सखुआ बोटा लदे एक वाहन को जब्त किया था, जिसमें एक तस्कर की गिरफ्तारी भी हुई थी. इस कार्रवाई के बाद जब प्रभात खबर की टीम ने डूमारो-माल्हन पथ पर स्थित कुरमी टोला व आसपास के जंगलों का धरातलीय दौरा किया, तो कटे हुए पेड़ और बचे हुए अवशेष माफियाओं की मनमानी की गवाही देते नजर आये. वन रक्षा समितियां नाकाम : इतने बड़े पैमाने पर हो रही वनों की कटाई ने वन विभाग की कार्यशैली और मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. जंगलों की सुरक्षा के लिए करोड़ों की लागत और कागजी दावों के साथ बनायी गयी वन रक्षा समितियां इस पूरे मामले में मूकदर्शक बनी हुई हैं. हैरान करने वाली बात है कि विभाग को इतनी बड़ी कटाई की भनक तक नहीं है. वनरक्षी ने कहा इसकी जांच करेंगे, वहीं, रेंजर ने नहीं उठाया फोन : मामले को लेकर जब स्थानीय वनरक्षी आलोक तिग्गा से बात की गयी, तो उन्होंने कहा कि वे अवकाश पर थे. अब जानकारी मिलने के बाद वे प्रभावित इलाके का सघन दौरा कर जांच करेंगे और मामला सही पाये जाने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जायेगी. वहीं, इस विषय पर पक्ष जानने के लिए जब रेंजर नंद कुमार मेहता को दूरभाष पर कई बार फोन लगाया गया, पर उन्होंने फोन नहीं उठाया.

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