बेतला़ झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) रवि रंजन ने कहा कि झारखंड ही नहीं पूरे देश में पलामू टाइगर रिजर्व का अपना महत्व है. जहां देश के पहले टाइगर रिजर्व में एक पलामू टाइगर रिजर्व है वहीं दूसरी ओर 1936 में सबसे पहले बाघों की गिनती का काम पलामू टाइगर रिजर्व से ही हुआ था. इसलिए पलामू टाइगर रिजर्व अपने आप में बेमिसाल है. पिछले दिनों बेतला दौरा के क्रम में उन्होंने उक्त बातें कही. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षो से बढ़ती आबादी सहित अन्य कारणों के कारण जंगल और जानवरों का ह्रास हुआ है. लेकिन इसका प्रयास किया जा रहा है कि जंगल और जानवर को संरक्षण और संवर्धन की दिशा में काम करते हुए इसके पुराने गौरव को लौटाया जाये. इसके लिए वन विभाग ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य शुरू किया है. यहां बाघों और अन्य वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक और समुदाय-आधारित दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है. बाघों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जा रहा है घास के मैदानों का निर्माण और जल स्रोतों का कुशल प्रबंधन किया जा रहा है. पलामू टाइगर रिजर्व से जयगीर गांव का पूर्ण पुनर्वास किया गया है, जिससे वन्यजीवों के लिए मानव-मुक्त क्षेत्र उपलब्ध हुआ है. मौके पर डिप्टी डायरेक्टर कुमार आशीष, प्रशिक्षु आइएफएस, रेंजर उमेश कुमार दुबे सहित अन्य लोग मौजूद थे.
पलामू टाइगर रिजर्व के पुराने गौरव को लौटाने का हर संभव होगा प्रयास : पीसीसीएफ
पलामू टाइगर रिजर्व के पुराने गौरव को लौटाने का हर संभव होगा प्रयास : पीसीसीएफ
