एलपीजी की किल्लत के भय से देशी जुगाड़ की ओर लौटने लगी हैं महिलाएं

एलपीजी की किल्लत के भय से देशी जुगाड़ की ओर लौटने लगी हैं महिलाएं

बेतला़ अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने ग्रामीण क्षेत्रों की रसोई का गणित बिगाड़ दिया है. एलपीजी गैस की संभावित किल्लत और आसमान छूती कीमतों के डर से बेतला और आसपास के ग्रामीण इलाकों की महिलाएं एक बार फिर पारंपरिक ईंधन की ओर लौटने लगी हैं. जो परिवार पूरी तरह गैस चूल्हे पर निर्भर हो गये थे, वहां अब फिर से मिट्टी के चूल्हे सुलगने लगे हैं. ईंधन जुटाने की मशक्कत, बढ़ा काम का बोझ : गैस सिलेंडरों की भारी कमी के कारण महिलाएं सुबह से ही समूहों में निकलकर गोयठा (गोबर के उपले) और सूखी लकड़ियां इकट्ठा करने में जुट गयी हैं. शहरी क्षेत्रों की महिलाएं भी टेंपो व अन्य वाहनों से जंगलों और गांवों की ओर रुख कर रही हैं, ताकि भविष्य के लिए जलावन का स्टॉक जमा कर सकें. जंगलों पर बढ़ा खतरा : जलावन की बढ़ती मांग के कारण जंगलों पर दबाव अत्यधिक बढ़ गया है. कई लोग बड़े पैमाने पर लकड़ियां काटकर खेतों और खलिहानों में जमा कर रहे हैं. शहरी खरीदार भी अब गांवों में पहुंचकर थोक में लकड़ियां खरीद रहे हैं, जिससे अवैध कटान की आशंका तेज हो गयी है. हालांकि, प्रशासन गैस आपूर्ति सामान्य करने का दावा कर रहा है, लेकिन अनिश्चितता के माहौल में लोग पारंपरिक संसाधनों को ही सुरक्षित मान रहे हैं.

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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