कौन हैं ईरान के इस्माइल खतीब, जिन्हें इजरायल ने टारगेटेड अटैक में मारने का किया दावा

Esmaeil Khatib : 28 फरवरी से ईरान पर शुरू किए गए अमेरिकी–इजरायली हमले में ईरान के अबतक 40 से अधिक शीर्ष अधिकारी और कई टाॅप लेवल के नेता मारे गए हैं. सबसे बड़ा नाम सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और अली लारीजानी, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का है. अब इस क्रम में एक और बड़ा नाम जुड़ गया है इस्माइल खतीब.

Esmaeil Khatib : इजरायल डिफेंस फोर्सेज ने यह दावा किया है कि उसने ईरानी सरकार के इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खतीब को मार दिया है. फोर्सेज द्वारा एक्स पर किए गए पोस्ट में कहा गया है कि तेहरान में किए गए टारगेटेड स्ट्राइक में ईरानी सरकार के इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खतीब मारे गए हैं. इस्माइल खतीब ने हाल ही में पूरे ईरान में हुए प्रोटेस्ट में अहम भूमिका निभाई थी. इजरायल डिफेंस फोर्सेज यह भी दावा करता है कि खतीब ने दुनिया भर में इजरायलियों और अमेरिकियों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को लीड किया था.

कौन था इस्माइल खतीब?

इस्माइल खतीब ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा और खुफिया अधिकारी थे, जिनपर देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को बनाये रखने की जिम्मेदारी थी. वे ईरान के इंटेलीजेंस विभाग (MOIS) में मंत्री के रूप में कार्यरत थे, यह ईरान की प्रमुख खुफिया एजेंसी है. इस्माइल खतीब ने अपने करियर का ज्यादातर समय ईरान की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बिताया. वे खुफिया और धार्मिक संस्थानों से जुड़कर काम करते थे. उन्हें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का खास करीबी माना जाता था.खतीब का मुख्य काम जासूसी नेटवर्क चलाना और देश के भीतर विरोधी गतिविधियों पर नजर रखना था. उन्होंने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को नियंत्रित किया और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की. खतीब के बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने विदेश में ईरान विरोधी संगठनों और देशों के खिलाफ काम किया.

ईरान के वो नेता और अधिकारी जिन्हें मार दिया गया

ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए लगातार हमले में 2 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई है और लाखों लोग बेघर हो गए हैं. इन हमलों में ईरान के शीर्ष नेताओं और अधिकारियों को टारगेट किया गया है. अबतक जिन लोगों की मौत हुई है उनमें से प्रमुख लोगों के नाम इस प्रकार हैं-

क्रमनाम (हिंदी)पद / भूमिका
1Ali Khamenei (अली खामेनेई)सुप्रीम लीडर (देश का सर्वोच्च पद)
2Ali Larijani (अली लारिजानी)राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ नेता
3Ali Shamkhani (अली शामखानी)सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल प्रमुख
4Mohammad Shirazi (मोहम्मद शिराजी)सुप्रीम लीडर के सैन्य कार्यालय प्रमुख
5Mohammad Pakpour (मोहम्मद पाकपूर)इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) प्रमुख
6Abdolrahim Mousavi (अब्दोलरहीम मौसवी)चीफ ऑफ स्टाफ (ईरानी सशस्त्र बल)
7Aziz Nasirzadeh (अजीज नसीरजादेह)रक्षा मंत्री
8Gholamreza Soleimani (गोलामरेजा सोलैमानी)बेसिज फोर्स प्रमुख
9Salah Asadi (सलाह असदी)वरिष्ठ सुरक्षा/खुफिया अधिकारी
10Esmaeil Khatib (इस्माइल खतीब)खुफिया मंत्री (MOIS प्रमुख)

ये भी पढ़ें : असम के कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने बीजेपी ज्वाइन किया, कहा–पार्टी में घुटन हो रही थी

नोरा फतेही के गाने सरके चुनर पर बैन, समझिए सरकार ने क्यों उठाया यह कदम

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >