लातेहार : प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह मोटर क्षतिपूर्ति ट्रिब्यूनल राजेश कुमार वैश्य ने दावा वाद संख्या 44/2014 की सुनवाई करते हुए ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी को दावाकर्ता को 26 लाख पांच हजार रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है.
बीमा कंपनी को 90 दिनों के भीतर आदेश की राशि का भुगतान नहीं करने पर नौ प्रतिशत की दर से ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया गया है. दावाकर्ताओं के अधिवक्ता सुनील कुमार ने बताया कि तीन सितंबर को दावाकर्ता पूनम देवी के पति की मृत्यु वाहन दुर्घटना में हो गयी थी.
मृतक पंजीकृत संवेदक था तथा आयकर दाता था. अदालत ने मृतक की पत्नी, बेटा और माता-पिता को अलग अलग राशि फिक्स डिपोजिट करने का आदेश पारित किया. अदालत ने मृतक के इलाज में हुए खर्चों के विपत्रों के एवज में कुल 1,30,206 रुपये को क्षतिपूर्ति में शामिल किया है. ट्रिब्यूनल में बीमा कंपनी का पक्ष वरीय अधिवक्ता राजेश्वर पांडेय ने रखा.
कैसे करते हैं दावा
मृत्यु प्रमाण पत्र, पारिवारिक प्रमाण पत्र, एफआइआर, आमदनी प्रमाण पत्र व उम्र प्रमाण पत्र (मृतक के) के साथ ट्रिब्यूनल में अधिवक्ता के जरिये वाद दायर करना होता है. अधिवक्ता केस फाइल करता है, जिसके बाद सुनवाई होती है. जिस गाड़ी से दुर्घटना हुई है, उसके चालक, मालिक और गाड़ी का इंश्योरेंस करनेवाली कंपनी को प्रतिवादी बनाया जाता है.
कितना मिलता है क्लेम
मृतक की आमदनी और उसकी उम्र के आधार पर अदालत इंश्योरेंस कंपनी, गाड़ी मालिक को दावाकर्ता को भुगतान करने का आदेश देती है.
