झुमरीतिलैया: श्रावण मास के अवसर पर शिव भक्ति का रंग पूरे जिले में गहराने लगा है. एक ओर शिव वाटिका में बाबा का भव्य दरबार सजाकर कांवरियों की नि:शुल्क सेवा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और महिला संगठन सावन उत्सव की तैयारियों में जुट गये हैं. पूरे जिले में भक्ति, संस्कृति और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है.
शिव वाटिका में आने वाले कांवरियों के लिए नि:शुल्क चाय, पानी, भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गयी है. शनिवार की रात उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से पहुंचे बम कांवरियों का बाबा निवास शिव वाटिका में गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया. देर रात तक भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते नजर आये.
इसके बाद सभी कांवरियों के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था की गयी. शिव वाटिका के संचालक सुजीत लोहानी ने बताया कि पिछले 14 वर्षों से लगातार श्रावण माह में कांवरियों की नि:शुल्क सेवा की जा रही है.
इस वर्ष भी बाबा निवास में आकर्षक दरबार सजाया गया है. पूरे श्रावण मास के दौरान प्रतिदिन पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं की सेवा का कार्यक्रम देर रात तक चलता रहेगा. उन्होंने कहा कि शिव भक्तों की सेवा ही उनका प्रमुख उद्देश्य है और सभी कांवरियों का पूरे उत्साह एवं श्रद्धा के साथ स्वागत किया जा रहा है.
इधर, श्रावण माह के आगमन के साथ ही अभ्रक नगरी कोडरमा में सावन उत्सव की तैयारियां भी तेज हो गयी हैं. 31 जुलाई से 28 अगस्त तक विभिन्न संस्थाओं की ओर से सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. महिलाओं में उत्सव को लेकर विशेष उत्साह है. वे हरी साड़ी, हरी चूड़ियां और पारंपरिक परिधान में सावन गीत, नृत्य और संगीत के माध्यम से उत्सव मनायेंगी.
सावन उत्सव के दौरान विभिन्न स्थानों पर मेले भी लगाये जायेंगे, जहां राखी, कपड़े, ज्वेलरी, सजावटी सामग्री और व्यंजनों के स्टॉल आकर्षण का केंद्र होंगे. झूला उत्सव के साथ पौधरोपण जैसे सामाजिक कार्यक्रम भी होंगे.
माहुरी महिला मंडल, मोदी वर्णवाल महिला मंडल, मारवाड़ी युवा मंच की प्रेरणा शाखा, इनरव्हील क्लब, विशुनपुर महिला मंडल, काली महिला मंडल, चंद्रवंशी महिला मंडल, मिथिलांचल महिला मंडल और बंगाली महिला मंडल सहित कई संस्थाएं सावन उत्सव एवं श्रावणी महफिल का आयोजन करेंगी. इसके अलावा मेहंदी, ड्रॉइंग और अन्य सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी.
आयोजकों का कहना है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण के साथ सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जायेगा.
