दसलक्षण पर्व पर मुनि सुयश सागर ने बताया लोभ त्याग का महत्व

जैन धर्म के दसलक्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म मनाया गया. मुनि 108 सुयश सागर जी महाराज ने बताया कि लोभ ही जीवन की सबसे बड़ी गंदगी और पाप है. उन्होंने लोभ के त्याग और संतोष के महत्व पर प्रकाश डाला.

झुमरीतिलैया. जैन धर्म के सर्वोच्च पर्व दसलक्षण पर्यूषण के चौथे दिन शनिवार को जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम शौच धर्म मनाया. चातुर्मास कर रहे जैन मुनि 108 सुयश सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी गंदगी और पाप लोभ है. लोभ मन और मस्तिष्क को दूषित करता है. लोभ का त्याग ही उत्तम शौच धर्म है.

लोभ से बढ़ती है अशांति और संघर्ष

मुनि सुयश सागर जी ने कहा कि लोभ पाप का मूल है और सबसे बड़ा लोभ जीवन का लोभ है. मनुष्य इच्छा और आकर्षण के पीछे भागते हुए लोभ में फंस जाता है. इसी कारण संसार में अशांति, हिंसा और संघर्ष बढ़ता है. कौरवों को सत्ता का लोभ था, जिसके कारण महाभारत जैसा विनाशकारी युद्ध हुआ.

उन्होंने कहा कि मनुष्य की इच्छाओं की पूर्ति कभी पूरी नहीं होती. संतोष ही जीवन को सुख और शांति प्रदान कर सकता है. मुनिश्री ने कहा कि बाहरी शुद्धता से पहले अंतरंग शुद्धता जरूरी है. शरीर को स्नान से साफ करने के साथ-साथ बुरे कर्मों और विकारों को भी धोना आवश्यक है. जितना प्राप्त है, उतना ही पर्याप्त मानने की भावना जीवन में संतोष और पवित्रता लाती है.

दोनों मंदिरों में हुई विशेष पूजा-अर्चना

इस अवसर पर सुबह दोनों जैन मंदिरों में दसलक्षण धर्म की विशेष पूजा-अर्चना हुई. श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से अभिषेक और शांतिधारा में भाग लिया. मुनि सुयश सागर जी ने विश्व शांति मंत्रों के साथ अभिषेक एवं शांतिधारा करायी. वीरागोदय चातुर्मास एवं शिविर समिति के संयोजकों ने पूजा-विधि और मंदिर से संबंधित जानकारी दी. पंडित अभिषेक शास्त्री एवं संगीतकार सुबोध गंगवाल ने विधान पूजा संपन्न करायी.

बड़ा मंदिर में अभिषेक और शांतिधारा

स्टेशन रोड स्थित बड़ा मंदिर में पारसनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा ललित सृष्टि जैन अजमेरा हजारीबाग ने किया. भगवान आदिनाथ को पांडुकशिला पर विराजमान कराने एवं प्रथम अभिषेक-शांतिधारा का सौभाग्य यशवीर, युवान, सुरेश, शैलेश और सौरभ लुहारिया परिवार को मिला. अपने जुड़वा पुत्रों के जन्मदिन पर परिवार ने शांतिधारा की.

पंडाल परिसर में भगवान महावीर स्वामी का प्रथम अभिषेक अजीत, राजेश एवं मनोज गंगवाल परिवार ने किया. भगवान महावीर की शांतिधारा एवं पुष्पदंत भगवान पर कमल-कुसुम रति तीर्था गंगवाल परिवार ने की.

नया मंदिर में भी हुए धार्मिक अनुष्ठान

नया मंदिर में भगवान महावीर का प्रथम कलशाभिषेक एवं शांतिधारा ओमप्रकाश-विनीत सेठी परिधान एवं फूलचंद-प्रदीप पांड्या परिवार ने की. भगवान आदिनाथ की वेदी पर जन्मदिन के अवसर पर अभिषेक गंगवाल एवं आशीष गंगवाल परिवार ने अभिषेक किया. निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य मुन्ना बाकलीवाल एवं प्रदीप पांड्या परिवार को मिला. शाम को भव्य आरती के बाद विद्यासागर पाठशाला के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया.

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By Rajesh

राजेश सिंह, जयनगर वर्ष 2000 से प्रभात खबर से जुड़ कर काम कर रहे हैं. आंचलिक पत्रकारिता का करीब 26 वर्षों का लंबा अनुभव है.

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