जयनगर: भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और पारिवारिक संस्कारों का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व इस वर्ष शुक्रवार को मनाया जाएगा. पंचांग के अनुसार श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी. परंपरागत गणना के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाना उचित माना गया है.
रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, सम्मान, जिम्मेदारी और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने की भावना को मजबूत करने वाला पर्व है. इस दिन बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी आरती करती है और कलाई पर राखी बांधती है.
भाई भी बहन के प्रति स्नेह और उसके सम्मान व सुरक्षा के लिए अपने दायित्व का संकल्प व्यक्त करता है। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं देते हैं.
क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से रक्षाबंधन का संबंध रक्षा, विश्वास और मंगलकामना से जुड़ा है. हिंदू परंपरा में श्रावण पूर्णिमा को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है. रक्षासूत्र बांधने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और समय के साथ यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते का प्रमुख उत्सव बन गया. उक्त बातें तिलोकरी के पिंटू कुमार पांडेय ने रक्षाबंधन पर प्रकाश डालते हुए कही.
उन्होने कहा कि रक्षाबंधन का व्यापक संदेश यह है कि परिवार में प्रेम व आपसी सम्मान बना रहे तथा भाई बहन एक दूसरे की भावना और अपनी जिम्मेवारी को समझे. पंडित श्री पांडेय ने रक्षाबंधन के महत्व पर कहा कि यह पर्व भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की मजबूती का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि राखी का धागा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी और संस्कार का प्रतीक है.
उन्होंने लोगों से अपील की कि रक्षाबंधन को केवल उपहारों के आदान-प्रदान तक सीमित न रखते हुए परिवार में आपसी सम्मान, स्नेह और सहयोग की भावना को मजबूत करने के संकल्प के साथ मनाएं. उल्लेखनीय है कि 2026 में रक्षाबंधन के लिए पंचांग आधारित स्रोत 28 अगस्त को पर्व की तिथि बताते हैं. स्थानीय परंपरा अथवा पंचांग के अनुसार पूजा और राखी बांधने के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है.
