हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्यकारों का जुटान, साहित्य की जिम्मेदारी पर मंथन

कोडरमा में जनवादी लेखक संघ द्वारा हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें साहित्यकारों ने सामाजिक सरोकारों पर चर्चा की।

कोडरमा. जनवादी लेखक संघ (जलेस), कोडरमा की ओर से हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को अवध्या क्लासेस, झुमरीतिलैया में साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के जिलाध्यक्ष गिरधर प्रसाद ने की. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ. इस दौरान कवियों और साहित्यकारों ने अपनी नई रचनाओं का पाठ किया. रचनाओं में सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदना, लोकतांत्रिक मूल्यों और वर्तमान समय की चुनौतियों को प्रमुखता से अभिव्यक्त किया गया.

साहित्यकार की जिम्मेदारी पर हुई चर्चा

कार्यक्रम में जलेस के सचिव राम रतन अवध्या ने "जनवादी लेखक संघ की प्रासंगिकता और हमारी साहित्यिक जिम्मेदारी" विषय पर विचार रखे. उन्होंने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का सुंदर संयोजन नहीं, बल्कि अपने समय की धड़कनों को सुनने और समाज की सच्चाइयों को सामने लाने का माध्यम है.

उन्होंने कहा कि अन्याय, शोषण, बेरोजगारी, सांप्रदायिकता और सामाजिक असमानता के दौर में साहित्यकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. किसान, मजदूर, बेरोजगार युवा, महिला, दलित, आदिवासी और अन्य वंचित वर्गों के संघर्ष व पीड़ा साहित्य के केंद्र में आने चाहिए.

प्रेम, भाईचारे और मानवीय मूल्यों की आवाज बने साहित्य

राम रतन अवध्या ने कहा कि नफरत के दौर में साहित्य को प्रेम, भाईचारे और मानवीय मूल्यों की आवाज बनना होगा. उन्होंने वैज्ञानिक चेतना, तर्क और विवेक को मजबूत करने तथा अंधविश्वास और अवैज्ञानिक सोच के खिलाफ साहित्यकारों की भूमिका पर भी जोर दिया.

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है. असहमति का सम्मान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सामाजिक समानता, न्याय और नागरिक अधिकार इसके मूल आधार हैं. लेखक का दायित्व समाज के सामने आईना रखना और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना है.

कार्यक्रम में कंचन लता वर्णवाल, प्रधुम्न त्रिपाठी, राज किशोर सिंह, एस.एस. शर्मा, डॉ. अनुपमा शुक्ला, डॉ. शालिनी कौशल, खुशबू कुमारी, चंद्रलता वर्णवाल, वैभव कुमारी, विजय कुमार पांडेय सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार और संघ के सदस्य मौजूद थे.

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लेखक के बारे में

By Vikash Kumar

विकास कुमार को 17 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव है. प्रभात खबर में वर्ष 2012 से जुड़े हुए हैं. बतौर ब्यूरो प्रमुख कोडरमा में सेवाएं दे रहे हैं. इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के साथ क्राइम व पॉलिटिक्स की खबरों पर अच्छी पकड़ है. प्रभात खबर से पहले दैनिक जागरण से जुड़े रहे हैं. नयी दिल्ली, नोएडा व पंजाब जैसे शहरों में कार्य कर चुके हैं. इन्हें रिपोर्टिंग के साथ डेस्क पर भी वर्षों काम करने का अनुभव है. कोडरमा से रिपोर्टिंग के दौरान इन्होंने शिक्षक नियुक्ति घोटाला, कल्याण विभाग में घोटाला सहित कई गड़बड़ियों को उजागर किया है. इनकी अवैध खनन को लेकर की गयी बेहतरीन व अलग रिपोर्टिंग के लिए भी इनकी खुले मंच पर प्रशंसा हो चुकी है.

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