कोडरमा. अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश दिवस पर शनिवार को सदर अस्पताल कोडरमा में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस वर्ष कार्यक्रम की थीम स्नेक बाइट सर्वाइवर्स एंड रिसोर्सेज : चैंपियंस फॉर चेंज रखी गयी. कार्यक्रम में अधिकारियों ने सर्पदंश से होने वाली मौत, इसके लक्षण, बचाव और समय पर उपचार की जानकारी दी.
अलग-अलग सांपों के डसने पर दिख सकते हैं अलग लक्षण
जिला आरसीएच पदाधिकारी डॉ केके शर्मा, जिला सर्विलांस पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार और जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रमण कुमार ने बताया कि अलग-अलग प्रजाति के सांपों के डसने पर अलग-अलग लक्षण दिखायी दे सकते हैं. ऐसे में घबराने के बजाय पीड़ित को शांत रखते हुए जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाना जरूरी है. सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) उपलब्ध है.
कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम प्रबंधक महेश कुमार, जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट, जिला डाटा प्रबंधक पवन कुमार, जिला डाटा एंट्री ऑपरेटर समेत अन्य मौजूद थे.
सर्पदंश के बाद क्या करें
सांप के डसने पर प्रभावित स्थान को साफ पानी से साफ कर पीड़ित को शांत रखें. हाथ पर डसने की स्थिति में हाथ को स्थिर रखते हुए रोगी को अस्पताल ले जायें. चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार रास्ते में वेनम एक्सट्रैक्शन की व्यवस्था की जा सकती है. पीड़ित को बिना विलंब अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी है.
डसे स्थान को काटने या चूसने से बचें
सर्पदंश वाले स्थान को काटने, दबाने या चूसने का प्रयास नहीं करना चाहिए. जहर को मुंह से निकालने या डसे गये स्थान पर अत्यधिक कसाव करने से भी बचना चाहिए. पीड़ित को अकेला न छोड़ें. झाड़-फूंक या अन्य अवैज्ञानिक उपायों में समय गंवाने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचायें.
