कोडरमा: समर्पण द्वारा वसुंधरा गार्डन कोडरमा में आयोजित दो दिवसीय सृजनात्मक सह-नाट्य कार्यशाला का समापन हुआ. दो दिनों तक चले प्रशिक्षण में प्रतिभागियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र के अनुभव साझा किया. सामाजिक बदलाव की कहानियों को समझा, समूहों में पटकथा लेखन किया तथा नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति के माध्यम से विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर प्रभावी संवाद स्थापित करने का अभ्यास किया.
कार्यशाला के दौरान थिएटर गेम्स, संवाद सत्र, समूह चिंतन, कहानी लेखन, इम्प्रोवाइजेशन और प्रस्तुति जैसी सहभागी गतिविधियां आयोजित की गयी. समापन सत्र में समर्पण के सचिव इन्द्रमणि साहू ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन केवल परियोजनाओं से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आये वास्तविक बदलाव और उन बदलावों की कहानियों से दिखाई देता है.
उन्होंने कहा कि यदि लोग अपनी कहानियां स्वयं नहीं कहेंगे तो उनकी आवाज़ कहीं खो जायेगी. इसलिए अनुभवों को सहेजने, समझने और प्रभावी ढंग से समाज के सामने प्रस्तुत करने की आवश्यकता है. उन्होंने व्यवहारिक रूप से समझाते हुए उनके अनुभवों को प्रभावशाली सामाजिक कहानियों और नुक्कड़ नाटकों के रूप में प्रस्तुत करने की क्षमता विकसित की जा रही है.
उन्होंने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जो आगे भी जारी रहेगी. रिसोर्स मैनेजर पुरुषोत्तम गिरी ने कहा कि संस्था अपने कार्यों के दस्तावेजीकरण, सीखने की संस्कृति और नेरेटिव बिल्डिंग को और अधिक मजबूत करेगी. संचालन रंगकर्मी मंटू कुमार ने किया.
उन्होंने कहा कि रंगमंच सामाजिक संवाद का एक प्रभावी माध्यम है और नुक्कड़ नाटक केवल अभिनय नहीं, बल्कि समुदाय के अनुभवों, संघर्षों और उम्मीदों को जीवंत रूप में समाज के सामने रखने का सशक्त मंच है.
मौके पर फैसिलिटेटर नवीन कुमार, सलोनी कुमारी, पूनम साहू, प्रिंस प्रभात, जितेन्द्र कुमार, जय ललिता देवी, रजनी कुमारी, लवली कुमारी, कल्पना कुमारी, पिंकी देवी, विमला देवी, राजेश कुमार, निलेश कुमार, बबीता देवी, सुनील कुमार, मेरियन सोरेन, अजय पांडेय, योगेश कुमार आदि मौजूद थे.
