नपा निधि से करना होगा पेंशन का भुगतान

सरकार के प्रधान सचिव ने जारी किया स्पष्ट निर्देश विभाग से पेंशन व उपादान की राशि मांगते रहे हैं कर्मी कोडरमा : राज्य के नगरपालिकाओं में कार्यरत कर्मियों को पेंशन व उपादान की राशि का भुगतान नगर विकास विभाग नहीं करेगा, बल्कि इसका भुगतान नगरपालिका को स्वयं अपने निधि से करना होगा. इस संबंध में […]

सरकार के प्रधान सचिव ने जारी किया स्पष्ट निर्देश
विभाग से पेंशन व उपादान की राशि मांगते रहे हैं कर्मी
कोडरमा : राज्य के नगरपालिकाओं में कार्यरत कर्मियों को पेंशन व उपादान की राशि का भुगतान नगर विकास विभाग नहीं करेगा, बल्कि इसका भुगतान नगरपालिका को स्वयं अपने निधि से करना होगा. इस संबंध में नगर विकास व आवास विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने स्पष्ट निर्देश जारी कर दिया है. जानकारी के अनुसार झारखंड लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन के बैनर तले नगर निकाय के कर्मी लंबे समय से वेतन की तरह पेंशन व उपादान का भुगतान नगर विकास विभाग से शेयर पर करने की मांग कर रहे हैं.
नगर निकाय कर्मियों को वेतन की राशि का 70 प्रतिशत नगर विकास विभाग व 30 प्रतिशत स्थानीय नगर निकाय की निधि से होता है. कर्मी मांग कर रहे थे की पेंशन व उपादान की राशि की भुगतान का नियम बदला जाये. बीते माह की गयी हड़ताल के बाद सरकार स्तर से सकारात्मक पहल की बात कही गयी, लेकिन सरकार के प्रधान सचिव ने अब स्पष्ट निर्देश जारी कर दिया है.
पत्र में कहा गया है कि झारखंड नगर पालिका अधिनियम 2011 की धारा 58-ए में प्रावधान है कि नगर पालिका के कर्मी पेंशन, उपादान, भविष्य निधि, वेतन व भत्ता नगर पालिका निधि से प्राप्त करेंगे. झारखंड नगर पालिका सेवा सवंर्ग नियमावली 2014 में भी यह प्रावधान किया गया है कि संबंधित स्थानीय नगर निकाय कर्मियों के वेतन भत्ते व पेंशन आदि के भुगतान के लिए सीधे तौर पर जिम्मेवार होंगे. कहा गया है की अगर शहरी स्थानीय निकाय के तहत पदस्थापित कर्मियों को वेतन भत्ता देने में संबंधित विभाग अक्षम होंगे, तो राज्य सरकार स्व विवेक से आनुपातिक आवंटन काट कर क्षतिपूरक अनुदान के रूप में संबंधित नगर पालिका को मदद के तौर पर विमुक्त कर सकेगी.
अतिरिक्त वित्तीय बोझ का दिया हवाला
फेडरेशन की मांग को दरकिनार कर सरकार ने नगर पालिका निधि से ही पेंशन व उपादान का भुगतान करने को कहा है, तो इसके साथ ही परेशानी भी बतायी है. जारी पत्र में कहा गया है अगर सरकार स्तर से इसका भुगतान होगा, तो राजकोष पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा.
इसके साथ ही अन्य तरह की परेशानी भी सामने आ सकती है. फेडरेशन से जुड़े कर्मी के अनुसार सरकार व माननीय विधायक विधानसभा में अपना वेतन व भत्ता की बढ़ोतरी तो कई बार कर लेते हैं. एक बार जीतने के बाद भले ही चुनाव हार जाये. पेंशन व अन्य सुविधाएं जारी रहती है, पर साधारण नगर निकाय कर्मियों को वेतन के साथ ही नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन मिले, इसके लिए सरकार तैयार नहीं है, जबकि कर्मी नगर निकाय को अपनी सेवा लंबे समय से दे रहे हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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