गोशाला की जमीन से हटा कब्जा

हाईकोर्ट के निर्देश पर पांच वर्ष बाद प्रशासन ने की कार्रवाई, लोगों ने किया विरोध भवन व परिसर को कराया गया खाली, एक-एक मकान को ताला लगा कर किया गया सील झुमरीतिलैया : शहर के सरकारी बस स्टैंड के पास गोशाला समिति के भवन व परिसर में वर्षों से रह रहे लोगों को आखिरकार बेदखल […]

हाईकोर्ट के निर्देश पर पांच वर्ष बाद प्रशासन ने की कार्रवाई, लोगों ने किया विरोध
भवन व परिसर को कराया गया खाली, एक-एक मकान को ताला लगा कर किया गया सील
झुमरीतिलैया : शहर के सरकारी बस स्टैंड के पास गोशाला समिति के भवन व परिसर में वर्षों से रह रहे लोगों को आखिरकार बेदखल होना पड़ा. करीब पांच वर्ष पूर्व हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला प्रशासन ने अब जाकर कार्रवाई करते हुए इस परिसर में मकान में रह रहे करीब दो दर्जन परिवार के लोगों से जमीन को खाली कराया.
हालांकि, पहले से विरोध के स्वर फूटने व लोगों द्वारा लगातार कार्रवाई का विरोध करने की बात से प्रशासन भी सतर्क नजर आया. सोमवार को प्रशासन तैयारी के साथ कब्जा हटाने के लिए पहुंचा था. दिन में करीब 11 बजे पहले प्रशासनिक पदाधिकारी तिलैया थाना में जुटे. इसके बाद यहां से तैयारी कर सभी पदाधिकारी व पुलिस फोर्स गोशाला की जमीन के पास पहुंचे और कुछ ही देर में कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गयी. प्रशासनिक कार्रवाई की भनक लगने से पहले ही अधिकतर लोगों ने मकान को खाली कर दिये थे, तो कुछ लोग मकान व कमरा खाली करने में लगे थे. इस बीच प्रशासन के पहुंचने पर वहां कुछ देर के लिए हड़कंप मच गया. प्रशासनिक टीम एसडीओ प्रभात कुमार बरदियार के नेतृत्व में मौके पर पहुंची थी.
शुरुआत में लोगों ने अपना पक्ष रखते हुए कार्रवाई का विरोध किया. ऐसे में तैयारी के साथ पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले तो कब्जा खाली करने के लिए आधा घंटे की मोहलत दी, फिर इसके बाद जमीन के एक हिस्से में खड़ी दीवार को जेसीबी से तोड़वाना शुरू कर दिया. जेसीबी लगते ही लोगों में रोष व्याप्त हो गया और कुछ लोग एसडीओ के पास पहुंचे व कार्रवाई का विरोध किया. एसडीओ खाली कराने की बात पर टिके रहे. एसडीओ ने कहा कि प्रशासन शांतिपूर्ण तरीके से लोगों से कब्जा हटाने की अपील कर रही है.
अगर ऐसा नहीं होगा, तो अगला कदम उठाया जायेगा. इसके बाद लोग शांत हो गये. हालांकि बीच-बीच में महिलाएं रोष जताती रही. प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर खाली होनेवाले मकान व कमरे में ताला लगा सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी गयी. इसके बाद एक-एक कर सभी मकानों में ताला लगाकर सील कर दिया गया. एसडीओ ने बताया कि खाली कर चाबी गोशाला समिति को सुपुर्द कर दी जायेगी.
काफी संख्या में थी पुलिस समिति के लोग भी थे मौजूद
लोगों के विरोध को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से व्यापक तैयारी की गयी थी. एसडीओ प्रभात कुमार बरदियार जहां खुद कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे थे, वहीं उनके साथ दंडाधिकारी के रूप में नियुक्त बीडीओ प्रभाष कुमार दत्ता, कार्यपालक दंडाधिकारी कमलेंद्र कुमार सिन्हा, रेणु बाला समेत कई अधिकारी मौजूद थे.
इसके अलावा तिलैया थाना प्रभारी राजवल्लभ पासवान, एसआई सुजीत कुमार, लाल बिहारी व भारी संख्या में पुलिस फोर्स मौके पर तैनात थे. महिला पुलिस कर्मी भी महिला थाना प्रभारी दीपांजलि तिर्की के नेतृत्व में मौजूद थी. इसके अलावा मौके पर गोशाला समिति के पदाधिकारी अध्यक्ष सुरेश जैन, सचिव मुरारी बडगवे, रामरत्न महर्षि, राजेंद्र गुटगुटिया, राम अवतार शर्मा, राम चौधरी के अलावा श्याम सुंदर सिंघानिया, ओम खेतान, विनोद कुमार, पुरुषोत्तम सलूजा, सिफी सिंह, महावीर व अन्य भी मौजूद थे.
वर्षों पुराना है जमीन विवाद का मामला
शहर के सरकारी बस पड़ाव के पास स्थित जमीन का विवाद वर्षों पुराना है. बताया जाता है कि उक्त जमीन पहले राजा राम नारायण सिंह की वकास्त जमीन थी. बाद में यह जमीन गोशाला समिति को मिली. कुछ लोगों को समिति ने किरायेदार के रूप में रखा. बाद में जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद शुरू हो गया. मामले को लेकर वर्षों से केस हाईकोर्ट में चला. कोर्ट ने अपने फैसले में मकान खाली करा कर समिति को सौंपने का निर्देश प्रशासन को दिया. बाद में कार्रवाई नहीं हुई.
इससे पहले एक बार प्रशासन ने खाली कराकर समिति को दिया भी था तो बाद में लोग पुन: यहां रहने लगे. हालांकि, यहां दखल कर रह रहे कैप्टन आनंद का तर्क है कि मामले को लेकर दो केस अलग-अलग जगहों में अभी भी दाखिल है. एक एसडीओ के निर्देश के विरोध में हाईकोर्ट में रीट याचिका दायर की गयी है, तो एक मामला निचली अदालत व एक मामला उपायुक्त के न्यायालय में लंबित है. इससे पहले एलआरडीसी की अदालत में समिति अपना केस हार चुकी है.
लादू राम शिखर चंद के नाम पट्टा पर दी गयी थी जमीन
एलआरडीसी के आदेश में इस बात का जिक्र है कि मौजा बेलाटांड़ के खाता नंबर चार, प्लाॅट नंबर 32 रकवा 54 डिसमिल जमीन खतियान में जमीन राजा राम नारायण सिंह की वकास्त जमीन है.
1926 में यह जमीन रामगढ़ इस्टेट अलेक्जेंडर माइकनेल वाल्टर जिस पर जमीन की देख-रेख की जिम्मेवारी थी, के उप प्रबंधक ने लादू राम शिखर चंद को 60 वर्षों की निबंधित पट्टा पर दिया. इसकी बिक्री व किराया किसी प्रकार से लेने की बात कहीं नहीं थी. शिखर चंद की मृत्यु के बाद उनके पुत्र नेमीचंद छाबड़ा व पत्नी मलिका कुमारी ने 23/12/1957 को कोडरमा गोशाला समिति के नाम से निबंधित विक्रय पत्र निर्गत कर दिया, जबकि पट्टा की अवधि 1980 तक थी. मामले में गोशाला समिति ने भी अपना पक्ष रखा था और कहा था कि जमीन समिति की है और लगातार नगर पालिका को टैक्स भी देते रहे हैं.
इसके विपरित जांच में यह मिला था कि पंजी टू में समिति का नाम तो है, पर दाखिल खारिज की संख्या नहीं है. इस पर सक्षम न्यायालय द्वारा स्वत्व के निर्धारण तक निर्गत हो रहे लगान रसीद को स्थगित किया जाता है.

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