सदर अस्पताल . राम भरोसे चल रहा है स्वास्थ्य सुविधा
आंखों देखी
शुक्रवार को चार डॉक्टरों की ड्यूटी लगी थी, लेकिन एक चिकित्सक के भरोसे था ओपीडी. महिला चिकित्सक का कक्ष भी था खाली.
कोडरमा बाजार : सदर अस्पताल की लचर व्यवस्था का खामियाजा आये दिन मरीजों को भुगतना पड़ता है. व्यवस्था के खिलाफ आवाज भी उठती है, पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण व्यवस्था जस की तस बनी रहती है. अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों लोग इलाज कराने आते हैं. अफसोस की बात है की यहां की व्यवस्था पर न तो प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और न ही सामाजिक कार्यकर्ताओं का ध्यान जाता है. और न ही यहां मरीजों का कोई सुध लेता हैं. कभी कभार इस कुव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठती, तो जरूर है, पर वह नाकाफी है.
इसका ताजा उदहारण शुक्रवार को देखने को मिला. महिला व पुरुष रोगियों से भरा ओपीडी मात्र एक चिकित्सक डॉ मनोज कुमार के भरोसे नजर आया. वहीं महिला ओपीडी में केवल कुर्सियां ही नजर आयी. पता करने पर बताया गया कि शुक्रवार को चार चिकित्सकों की ड्यूटी है, जिसमे डॉ रंजन कुमार व डॉ रमन कुमार शुक्रवार को आयोजित होनेवाले मेडिकल बोर्ड में शामिल हैं (यह बोर्ड साप्ताहिक होता है, जहां जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आनेवाले नि:शक्तों को प्रमाण पत्र बोर्ड द्वारा निर्गत किया जाता है ) जबकि डॉ केएन प्रसाद नदारद पाये गये. महिला चिकित्सक डॉ अलंकृता मंडल का चेंबर खाली पाया गया.
मरीज कर रहे थे इंतजार, अंदर आराम से बैठे थे डीएस
महिला चिकित्सक के नहीं रहने से ओपीडी में डॉ मनोज ही महिला-पुरुष दोनों रोगियों का इलाज करते दिखे.अत्यधिक भीड़ होने के कारण सभी मरीज इस भीषण गरमी में दोपहर 12 बजे बरामदे में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करने करते दिखे. इस दौरान कोडरमा जेल के समीप सड़क दुर्घटना में घायल चार लोगों व सुंदर नगर से आये करंट लगे युवक का भी इलाज किया गया. कुल मिला कर एक डाॅक्टर के भरोसे महिला पुरुष मरीजों के अलावा इमरजेंसी मरीजों को भी देखा गया. इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि इलाज की गुणवत्ता कैसी होगी. जबकि ओपीडी से सटे डीएस कार्यालय में डीएस डॉ बिनोद कुमार व डॉ आर जेपी सिंह बैठे नजर आये.
कस्तूरबा की छात्राएं दो घंटे और मृतक के परिजन
सुबह से कर रहे थे डॉक्टर का इंतजार
ओपीडी में अन्य मरीजों के अलावा अपनी बारी आने का इंतजार करते कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय कोडरमा की पांच छात्राएं आशा, शीतल, रुबी, रिंकू व पूनम गरमी से परेशान नजर आयी. छात्राओं ने बताया कि उन्हें सर्दी व बुखार है. महिला चिकित्सक से इलाज कराने आयी थी, पर वह नहीं मिली. पिछले दो घंटे से अपने नंबर आने का इंतजार कर रहे हैं.
ढोढकोला मुखिया जुफन अंसारी ने बताया कि ढोढाकोला में मिट्टी धंसने से हुए तीन महिला मजदूरों की मौत के बाद उनके शव के अंत्यपरीक्षण के लिए बीती रात से ही वह और मृतक के परिजन सदर अस्पताल में हैं, मगर दोपहर 12 बजे तक शवों का अंत्यपरीक्षण नहीं हुआ है. डॉक्टर का इंतजार कर रहे हैं.
कैमरा चमकी, तो हरकत में आये डीएस
डॉ आरजेपी सिंह को ओपीडी में भेजा
जैसे ही प्रतिनिधि ने अस्पताल का हाल बयां करती दृश्यों का फोटो लेना शुरू किया. डीएस डॉ बिनोद कुमार ने शीघ्र डॉ आरजेपी सिंह को ओपीडी डॉ मनोज को सहयोग करने के लिए भेज दिया, जबकि इसके पूर्व वे गप्पे लड़ाते नजर आये.
वैकल्पिक चिकित्सा व्यवस्था की जा सकती थी: महेश
एसएफआइ के राज्य महासचिव महेश भारती ने व्यवस्था को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि सदर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था के लिए कई बार आंदोलन किया गया, मगर विभागीय पदाधिकारियों के उदासीन रवैये के कारण व्यवस्था जस की तस बनी हुई है. उन्होंने कहा कि यदि महिला चिकित्सक अवकाश में है, तो अस्पताल प्रबंधन वैकल्पिक व्यवस्था करके एक अतिरिक्त डॉ को ओपीडी में भेज सकता है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे उपायुक्त को ज्ञापन सौंप कर कार्रवाई की मांग करेंगे. यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो पार्टी चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करेगी.
