13 में से मात्र एक खदान में खनन कार्य चलने की पुष्टि
डोमचांच : प्रखंड में आस्था का केंद्र चंचाल पहाड़ स्थित चंचाल माता मंदिर के आसपास हो रहे पत्थर के उत्खनन से खतरा होने की बात सामने आने के बाद जांच के लिए अधिकारियों का दल शुक्रवार को पहुंचा.
एसडीओ प्रभात कुमार बरदियार के नेतृत्व में पहुंची टीम में डीएमओ राजेश लकड़ा, सीओ रिंकू कुमार, सीआई सीताराम महतो शामिल थे. टीम ने मंदिर के आसपास के क्षेत्र में चल रहे खनन कार्य का जायजा लेने के साथ ही मंदिर के संबंध में भी जानकारी ली. जांच में पाया गया कि खनन कार्य के कारण कुछ मिट्टी आस्था के लिए प्रयोग में आ रहे इंद्रामण तालाब में गिरी है.
इसके अलावा अधिकारियों को यहां कोई गड़बड़ी नजर नहीं आयी. एसडीओ बरदियार ने बताया कि मंदिर से 50 मीटर की दूरी पर एक खदान में खनन कार्य चल रहा है, जो नियमानुसार ठीक है.
इसके अलावा खनन से मंदिर में दरार जैसी कोई चीज नहीं है. पेड़ की जड़ के कारण दरार जैसी लाइन दिख रही है. उन्होंने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में 13 लोगों के खदान का लीज है, पर वर्तमान में मात्र एक खदान में खनन कार्य चल रहा है.
बाकी लोगों का लीज नवीकरण को लेकर आवेदन पेंडिंग है. ड्रैगन ब्लास्टिंग से हो रहे नुकसान के संबंध में पूछे जाने पर एसडीओ ने बताया कि इस तरह के मशीन का प्रयोग किये जाने की बात जांच के दौरान सामने नहीं आयी है. फिर भी डीएमओ से इसकी जांच के लिए कहा गया है. इधर, अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान मंदिर के पुजारी सुनील पांडेय ने यहां पर पेयजल, लाइट व यात्री शेड की व्यवस्था करने की मांग की. मौके पर सरकारी अमीन उमेश सिंह से मापी भी करायी गयी. जांच के दौरान भाजपा नेता भरत नारायण मेहता भी मौजूद थे.
लोगों का आरोप दरकिनार डीएफओ की अनुशंसा भी साइड
शुक्रवार को जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों के दल ने स्थानीय लोगों के आरोपों को दरकिनार कर दिया. लोगों का आरोप था कि खनन कार्य से मंदिर को खतरा है, जबकि जांच अधिकारी इससे इनकार कर रहे हैं. लेकिन लोगों की मानें, तो इसमें गोलमाल हुआ है.
मंदिर के पास चल रहे खनन से नुकसान है, जिसे अधिकारी नजरअंदाज कर रहे हैं. यही नहीं प्रभात खबर ने डीएफओ एमके सिंह की ओर से बार-बार इस क्षेत्र में खदानें बंद किये जाने की अनुशंसा करने के बावजूद इस तरह का क्लीन चिट दिये जाने के सवाल एसडीओ से की, तो उन्होंने कहा कि इस बिंदु पर जांच नहीं हुई है.
बता दें कि डीएफओ ने इस क्षेत्र में खनन से पर्यावरण को गंभीर क्षति बताते हुए खदान का लीज नवीकरण नहीं करने के साथ ही खदानों को क्रम वार बंद करने की अनुशंसा की है. इस बिंदु पर जांच अधिकारियों ने ध्यान ही नहीं दिया. ऐसे में पूरी जांच पर ही सवाल उठने लगे हैं.
