पहले दिन हुआ हवन, भजन व महाआरती श्री परमहंस बाबा का समाधि पर्व शुरू, चादरपोशी आज
डोमचांच: श्री परमहंस बाबा का 57वां समाधि पर्व मंगलावार को शुरू हुआ. तीन दिवसीय समाधि पर्व को लेकर श्रद्धालुओं का डोमचांच आना शुरू हो गया है. पहले दिन जहां हवन, भजन व महाआरती की गयी, वहीं 11 अक्तूबर को बाबा की समाधि पर चादरपोशी की जायेगी. अंतिम दिन गुरुवार को महाप्रसाद का वितरण किया जायेगा. […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
डोमचांच: श्री परमहंस बाबा का 57वां समाधि पर्व मंगलावार को शुरू हुआ. तीन दिवसीय समाधि पर्व को लेकर श्रद्धालुओं का डोमचांच आना शुरू हो गया है. पहले दिन जहां हवन, भजन व महाआरती की गयी, वहीं 11 अक्तूबर को बाबा की समाधि पर चादरपोशी की जायेगी. अंतिम दिन गुरुवार को महाप्रसाद का वितरण किया जायेगा. चादरपोशी के लिए श्रद्धालु डोमचांच पहुंच चुके है.
श्री परमहंस बाबा का जन्म गिरीडीह जिला के गोंदलीटांड़ में 1860 ई में एक मध्यम परिवार में हुआ था. जब बाबा पांच वर्ष के थे, तब उन्हें माता द्वारा बीज के रूप में ज्ञान प्राप्त हुआ था. महासंत श्री लंगटा बाबा ने नौ वर्ष की आयु में उनके इस ज्ञान को और विकसित किया. परमहंस बाबा सात वर्षों तक पूरे भारत वर्ष का भ्रमण करते रहें. भ्रमण करते-करते 1916 ई. में वे डोमचांच (द्रूमचक्र) आये. बाबा बच्चों के साथ मगन होकर खेलते थे.
बाल भाव को प्रमेश्वर भाव मानते थे. बाबा हमेशा कहते थे कि पानी व ज्ञान को छान लेना चाहिए. वे कभी किसी से भोजन, पैसा, वस्त्र वगैरह कुछ भी नहीं मांगते थे. उनका कहना था कि मनुष्य अगर फकीर हो जाये, तो किसी का सहारा न लें. उनका मानना था कि आत्म तत्व का अनुभव हो जाने पर न तो भूख सताता है और न ही प्यास. सेवा भाव व समता भाव उनके व्यक्तित्व का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू था. उन्होंने सैकड़ों मरणासन्न लोगों की रक्षा की और भयानक संकटों से हजारों की रक्षा की. बाबा की महासमाधि 1961 ई को परमहंसधाम डोमचांच काली मंडा में हुई. तब से उनकी समाधि पर्व हर वर्ष मनाया जाता है.
समाधि सेवक उमानाथेंद्र गुरु, विवेक इंद्र गुरु, आलोक इंद्र गुरु, स्वर्णिम इंद्र गुरु, बालेश्वर पांडेय, सुरेश पांडेय, लखन पांडेय, लंबोदर पांडेय, सदानंद पांडेय, राजीव सिंह, रिंकू सिंह, नरेश वर्णवाल, बक्शी शिंजन प्रसाद, नंदकिशोर शर्मा, मनोज जॉनी, सिकंदर राम, संजय सिंह धरावी, रंजीत सिंह, मनोज पांडेय, देवेंद्र सिंह, अरविंद सिंह, संजीव सिंह, प्रदीप सिंह, मलय पांडेय आदि समाधि पर्व को सफल बनाने में लगे है.