बुंडू. पंच परगना ही नहीं प्रदेश का सांस्कृतिक धार्मिक स्थल का प्रसिद्ध प्राचीन सूर्य मंदिर बुंडू प्रखंड स्थित हेठ बूढ़ाड़ीह गांव में प्रत्यक्ष का केंद्र है. जहां पर लोग पूजा-अर्चना कर अपनी मन्नतें पूरी करते हैं. कांची नदी तट पर स्थित इस मंदिर नीम के पेड़ नीचे प्राचीन सूरज भगवान सात घोड़े के साथ विराजमान हैं. स्थानीय ग्रामीण घासीराम महतो, वृंदावन महतो बताते हैं कि यह मंदिर सातवीं शताब्दी प्राचीन धाम है. 1000 साल से अधिक समय से परिसर भव्य कलाकृतियां स्थापित हैं. पूर्वज यहां पर पूजा अर्चना करते आ रहे हैं. पाहन घासीराम महतो बताते हैं कि यहां पर पूजा कर मन्नतें मांगने से पूरी होती है. चंद्रशेखर महतो और संमल राम महतो ने बताया कि यहां पर विशाल सूर्य मंदिर बनाने के लिए कई सामाजिक संगठन यहां आये थे. स्थानीय ग्रामीणों की मदद नहीं मिलने के कारण विशाल मंदिर नहीं बन पाया. छठ पूजा के अवसर पर कांची नदी में स्नान करें यहां प्रसाद ग्रहण करते हैं. छठ पर्व के मौके पर यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं. गांव के मगनसाय मुंडा और धर्मेंद्र महतो बताते हैं स्थानीय ग्रामीणों के मदद से मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है. ग्रामीणों के सहयोग से प्रतिवर्ष सूर्य चंडी महायज्ञ का आयोजन भी होता है. चंद्रशेखर महतो की अगवाई में सूर्य मंदिर परिसर में महापर्व छठ के अवसर पर प्रसाद भोग का वितरण प्रतिवर्ष किया जाता है. प्राचीन काल का यह भगवान सूरज का मूर्ति श्रद्धालु भक्तों और दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. ग्रामीण बताते हैं कि एक किलोमीटर दूर कांची नदी के पार प्राचीन कालीन प्रसिद्ध महामाया मंदिर है, जहां पर प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु भक्त पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. इसी तरह यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक का प्राचीन धार्मिक स्थल है. झारखंड प्रदेश के अतीत सांस्कृतिक धरोहर की पुस्तक में प्रथम स्थान माना गया है.
स्लग :::: प्रत्यक्ष आस्था का केंद्र है बुंडू के हेठ बूढ़ाडीह गांव का प्राचीनकालीन सूर्य मंदिर
मंदिर में पूजा कर मन्नतें मांगने से पूरी होने की मान्यता
ग्रामीणों के सहयोग से प्रतिवर्ष सूर्य चंडी महायज्ञ का आयोजन
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