बुंडू. जयशंकर प्रसाद विचार मंच एवं जनजातीय क्षेत्रीय भाषा विभाग, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के संयुक्त तत्वावधान में पंचपरगनिया भाषा साहित्य के महाकाव्य सिबुबारात का विमोचन किया गया. जिसके रचनाकार पंचपरगनिया भाषा के महाकवि स्वर्गीय राजकिशोर सिंह बुंड़ूवार हैं. 811 पृष्ठ की इस पुस्तक में कुल 09 सर्ग, पंचपरगनिया भाषा के ठेंठ चार छंद, पयार छंद, दुइपदी छंद, तीनपदी छंद, लयात्मक छंद व चार रस शृंगार, वीर, शांत एवं करुण रस का प्रयोग किया गया है. इस महाकाव्य में 20 हजार पद्य एवं 100 से अधिक पात्र हैं, जो इस महाकाव्य की शोभा बढा रहे हैं. सिबुबारात को पूरा लिखने में 6 वर्ष 11 महीने और 24 दिन का समय लगा. उक्त बातें विमोचन के समय गोस्सनर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ हाराधन कोईरी ने पुस्तक समीक्षा के दौरान कहीं. उन्होंने यह भी कहा की सिबुबारात का नायक कोई व्यक्ति न होकर स्वयं पांचपरगना क्षेत्र है. महाकाव्य रचना के क्षेत्र में यह नया प्रयोग है. पुस्तक का प्रकाशन झारखंड झरोखा, रांची के द्वारा किया गया है. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रभारी कुलपति सुरेश निराला, पद्मश्री मुकुंद नायक, पद्मश्री मधु मंसुरी हंसमुख, पद्मश्री महाबीर नायक, वरिष्ठ साहित्यकार डा. अशोक प्रियदर्शी, डा. पंकज मिश्र, श्री उमेश प्रसाद सिंह, डॉ अंबिका स्वांसी लेखिका टुलू आदि मौजूद थे.
पंच परगनिया महाकाव्य सिबूबारात महाकाव्य पुस्तक का विमोचन
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के संयुक्त तत्वावधान में पंचपरगनिया भाषा साहित्य के महाकाव्य सिबुबारात का विमोचन किया गया.
