सतीश शर्मा की रिपोर्ट
तोरपा (खूंटी): रेफरल अस्पताल तोरपा का भवन जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है. अस्पताल की छत से लगातार प्लास्टर गिर रहा है, जिससे इलाज कराने आने वाले मरीजों और भर्ती मरीजों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है. शनिवार को अस्पताल में एक बड़ा हादसा होने से टल गया. न्यू बॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) की छत का प्लास्टर अचानक गिर गया. घटना के समय यूनिट में तीन नवजात बच्चे भर्ती थे और नर्स ज्योति आईंद व सुषमा सुरीन ड्यूटी पर तैनात थीं. गनीमत रही कि छत का प्लास्टर नवजात बच्चों या नर्सों के ऊपर नहीं गिरा, अन्यथा गंभीर हादसा हो सकता था. अचानक प्लास्टर गिरने से ड्यूटी पर मौजूद नर्स डर गईं.
अस्पताल भवन की जर्जर स्थिति के कारण कई जगहों पर छत का प्लास्टर गिर चुका है. इससे पहले ओपीडी कक्ष के पास और रोगी वार्ड की छत से भी प्लास्टर गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं. अस्पताल के ड्रेसिंग रूम, दवरेफरल अस्पताल के भवन का निर्माण वर्ष 1985 में किया गया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दूबे ने इसका उद्घाटन किया था. निर्माण के बाद कई बार भवन की मरम्मत कराई गई, लेकिन आरोप है कि ठेकेदारों नेाखाना और ओपीडी कक्ष की छत भी खराब हो चुकी है, जहां कभी भी प्लास्टर गिरने की आशंका बनी हुई है.
मरम्मत के नाम पर हुई खानापूर्ति
रेफरल अस्पताल के भवन का निर्माण वर्ष 1985 में किया गया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दूबे ने इसका उद्घाटन किया था. निर्माण के बाद कई बार भवन की मरम्मत कराई गई, लेकिन आरोप है कि ठेकेदारों ने मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की. इसका नतीजा है कि भवन लगातार जर्जर होता चला गया.
नया भवन तैयार, लेकिन अब तक नहीं हुआ हैंडओवर
रेफरल अस्पताल की प्रभारी डॉ. अनुमिता रानी ने बताया कि भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी सिविल सर्जन समेत उच्च अधिकारियों को पहले ही दी जा चुकी है. उन्होंने बताया कि पुराने भवन के बगल में नया अस्पताल भवन बनकर तैयार है, लेकिन अब तक इसे अस्पताल प्रबंधन को विधिवत हैंडओवर नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी होते ही अस्पताल को नए भवन में शिफ्ट करने का काम शुरू कर दिया जाएगा. नए भवन में बिजली कनेक्शन के लिए बिजली विभाग के पास राशि भी जमा करा दी गई है.
