खूंटीः मुरहू के महर्षि मेंही आश्रम मलियादा में रविवार को विशेष सत्संग का आयोजन किया गया. सत्संग में ऋषिकेश आश्रम के स्वामी गंगाधर जी महाराज ने प्रवचन दिया. उन्होंने कहा कि देव दुर्लभ शरीर पाकर भी यदि मनुष्य भगवद्भक्ति, सत्संग - ध्यान नहीं करता तो दुःख में पड़ जायेगा. 84 लाख योनियों में पड़कर कीट पतंग पशु -पक्षी -कृमि बन कष्ट पायेगा. ईश्वर का विधान भगवत भजन है. उन्होंने कहा कि मानव योनि कर्म प्रधान है, अपने अच्छे कर्मों से हम जीवन को सुखी और सम्पन्न बना सकते हैं. उन्होंने बताया कि माता शबरी ने मतंग ऋषि से युक्ति लेकर भक्ति की, जिससे प्रभु राम स्वयं दर्शन देने पहुंचे.
संत मत सत्संग में ईर्ष्या खत्म कर प्रेम भाईचारा का मार्ग बताया गया है. उन्होंने भगवान शंकर और भस्मासुर की कथा सुनाकर, तथा राजा जनक अष्टावक्र मुनि के दृष्टांतों से सत्य और भक्ति के मार्ग को सरलतम शब्दों में बताया. कहा कि मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए. शुभ कर्म और संतोष से सुख मिलता है. सत्संग में लाहिड़ी बाबा, दिगंबर बाबा, राम बाबा, गोपाल बाबा ने भी प्रवचन दिये.
उन्होंने कहा कि संतों द्वारा बताए मार्ग पर चलकर मंत्र जप करते रहने से कभी कोई बाधा परेशानी नहीं होगी. कार्यक्रम में कोलकाता की मनीषा कटारिया और उनकी माता संतोष देवी अग्रवाल ने भंडारे का आयोजन किया. मौके पर डॉ धर्मेंद्र नाथ तिवारी, संजय सत्संगी, नंदिनी देवी, मूचीराय मुंडा, मंगल मुंडा, विष्णु मुंडा, जगमोहन पुर्ति, सुखराम मुंडा, ध्रुवेंद्र भास्कर, सुबोध साव, जगन्नाथ मुंडा, रासबिहारी मुंडा, रामहरि साव, सुरेश पंडित, सनिका मुंडा, गोला मुंडा, हरिद्वार ठाकुर, बीरु कुमार, संतोष गुप्ता, सूरजमल प्रसाद सहित अन्य उपस्थित थे.
