1958 में चतुर साहू की अगुवाई में निकला था रामनवमी जुलूस

तोरपा बाजारटांड़ में अखाड़ा बनाया गया था. अखाड़ा का नाम तरुण दल अखाड़ा रखा गया था.

सतीश कुमार, तोरपा. तोरपा में चतुर साहू की अगुवाई में 1958 में रामनवमी का पहला जुलूस निकाला गया था. तोरपा बाजारटांड़ में अखाड़ा बनाया गया था. अखाड़ा का नाम तरुण दल अखाड़ा रखा गया था. जुलूस में शामिल होने के लिए ईचा, कुलडा, बासकी, गुमडू, जरियागढ़ आदि गांव के लोग झंडा लेकर पहुंचते थे. गांव के शिवशंकर साहू, भुनेश्वर साहू, सेवानिवृत्त शिक्षक पंचम साहू आदि बताते हैं कि चतुर साहू का तोरपा में किराना दुकान था. उनका रांची आना-जाना था. वहां उन्होंने रामनवमी जुलूस देख कर तोरपा में भी रामनवमी जुलूस निकालने की इच्छा जतायी. उन्होंने तोरपा में रामनरेश भगत, छेदी सिंह, धुरंधर सिंह, तिलकु, कुमांग के सिधु गंझू, सुंदारी के नारायण साहू, नंदकिशोर भगत, जगदीश भगत, राजकिशोर गुप्ता, देवचंद गंझू, शम्भूनाथ सिंह बड़ाइक आदि लोगों से विचार-विमर्श किया. सभी ने मिलकर रामनवमी का जुलूस निकालने का निर्णय लिया. चतुर साहू समिति के पहले अध्यक्ष बने. तरुण दल अखाड़ा का निर्माण किया गया. भुनेश्वर साहू बताते हैं कि वे अखाड़ा के सचिव थे. अखाड़ा का अध्यक्ष रामनरेश भगत को बनाया गया था. पंचम साहू बताते हैं कि पहले साल जुलूस में 20-25 महावीरी झंडाें के साथ जुलूस निकाला गया था. इसके पूर्व बड़ाइक टोली के शम्भूनाथ सिंह के घर से झंडा निकलता था, जो तोरपा मेन रोड, देवी मंडप होते हुए महादेव मंडा में जाकर झंडा स्थापित कर दिया जाता था.

खूंटी से आते थे उस्ताद :

रामनवमी के दौरान अस्त्र-शस्त्र चालन सिखाने के लिए खूंटी के बेलहाथी के उस्ताद जेहल राम तोरपा आते थे. यहां एक महीना रहकर लोगों को लाठी, भाला, तलवार आदि का खेल सिखाते थे. स्थानीय स्कूल में शिक्षक रहे नित्यानंद गोराई व जीवन मांझी भी खेल सिखाते थे. रामनवमी के पूर्व चतुर साहू गांव में रांची से लाकर महावीरी झंडा बांटते थे.

1976 में ग्रीन एवन अखाड़ा ने शुरू किया खेलकूद :

1976 में रामनवमी महासमिति तोरपा का गठन किया गया. कुछ लोगों की टोली तरुण अखाड़ा से अलग होकर ग्रीन एवन अखाड़ा बनाया. रामनवमी महासमिति के पहले अध्यक्ष हलधर सिंह थे. उनकी अगुवाई में महासमिति ने जुलूस निकाला. महासमिति के बिजेंद्र भगत बताते हैं कि पहले ग्रीन एवन अखाड़ा का खेल कुम्हार टोली में गंगा महतो के घर के पास होता था. इसके बाद देवेंद्र साहू की जमीन पर खेल हुआ था. 1977 में तोरपा चौक पर बजरंग बली मंदिर की स्थापना के बाद, यहां पर खेलकूद होने लगा. खूंटी के राधेश्याम भगत युवाओं को खेल सिखाते थे.

बॉटम ::: फ्लैग ::::::: जुलूस में झंडा लेकर आते थे ईचा, कुलडा, बासकी, गुमडू, जरियागढ़ के ग्रामीण

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Author: SATISH SHARMA

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