प्रतिनिधि, तोरपा/रनिया.
जिन्होंने अपनी परंपरा और पूजा पद्धति छोड़ दी, वैसे आदिवासी आज आरक्षण का 80 प्रतिशत लाभ ले रहे हैं. उक्त बातें सर्व सनातन समाज के रनिया के बेलसियागढ़ बगीचा में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने शुक्रवार को बतौर मुख्य अतिथि कही. उन्होंने कहा कि संविधान में ‘जनजातीय’ शब्द और एसटी आरक्षण का प्रावधान जनजातीय समाज की परंपरा, पूजा-पद्धति और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए किया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि 1947 के बाद आरक्षण का बड़ा हिस्सा ईसाई मिशनरियों से जुड़े लोगों ने लिया, जबकि 20 प्रतिशत परंपरागत आदिवासी ही आरक्षण का लाभ ले सके. इस संदर्भ में पूर्व सांसद कार्तिक उरांव ने ईसाई धर्म अपनाने वालों को आरक्षण से वंचित करने के लिए विधेयक लाया था. जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार नहीं किया. श्री परांडे ने कहा कि विश्व में 50 से अधिक इस्लामिक और 120 ईसाई देश हैं, जबकि भारत और नेपाल ही ऐसे देश हैं, जहां हिंदू बहुसंख्यक हैं. ऐसे में हिंदू समाज को अपना अस्तित्व, परंपराओं और पहचान को लेकर गंभीरता से विचार करना होगा. श्री परांडे ने कहा कि हिंदू समाज विश्व का सबसे प्राचीन समाज है. जो हजारों वर्षों से अस्तित्व में रहा है. उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक हिंदू को अपनी संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए. भगवान बिरसा मुंडा को जबरन धर्मांतरण और दमन के खिलाफ आंदोलन करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया और उनकी मृत्यु जेल में हुई. उन्होंने कहा कि देश के साथ-साथ झारखंड में भी बांगलादेशी घुसपैठियों की संख्या बढ़ रही है. हमारी जमीन व बेटी हमारा अभिमान हैं. बांगलादेशी इन दोनों पर योजनाबद्ध तरीके से कब्ज़ा कर रहे हैं. मिलिंद परांडे ने तोरपा में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनसे आशीर्वाद लिया.विदेशी आक्रमण का शिकार हुआ है हिंदू समाज : गोपाल शर्मा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा ने कहा कि हिंदू समाज केवल एक-दो वर्षों का नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से आक्रमणों का शिकार रहा है. आस्था के केंद्र रहे मंदिरों को तोड़ा गया, जिससे समाज का आत्मबल कमजोर हुआ. इस दीर्घ आक्रमण काल में हिंदू समाज का विघटन हुआ, जिसके लिए कहीं-न-कहीं समाज स्वयं भी जिम्मेदार रहा है. क्योंकि हम अपनी व्यक्तिगत चिंताओं में उलझते चले गये.
