खूंटी के रनिया में हाथियों का आतंक, पुराने स्कूल भवन को किया क्षतिग्रस्त; धान की फसल भी रौंदी

झारखंड के रनिया में जंगली हाथियों ने स्कूल भवन की दीवारें तोड़ी और धान की फसल रौंद दी। ग्रामीणों में दहशत का माहौल, वन विभाग से मुआवजे की मांग की गई।

रनिया. प्रखंड क्षेत्र में सोमवार की रात करीब 10 बजे जंगल से भटककर दो जंगली हाथी डिगरी केराटोली गांव के समीप पहुंच गये. हाथियों ने गांव के पास बंद पडे पुराने स्कूल भवन की खिडकी और बाउंड्री वॉल तोडकर क्षतिग्रस्त कर दी. इसके बाद आसपास के खेतों में लगी धान की फसल को भी नुकसान पहुंचाया.

हाथियों के गांव के समीप पहुंचने की जानकारी मिलते ही ग्रामीण एकजुट हो गये. हाथियों की मौजूदगी से गांव में दहशत का माहौल रहा. ग्रामीणों ने पूरी रात रतजगा कर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी. देर रात काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने हाथियों को गांव से दूर खदेड़ा और उन्हें वन क्षेत्र की ओर भेज दिया.

ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों के दोबारा गांव की ओर लौटने की आशंका बनी हुई है. घटना की जानकारी पीडित परिवार और ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मियों को दी है. ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त स्कूल भवन और धान की फसल का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है.

वन विभाग ने सावधानी बरतने की अपील की

प्रभारी वनपाल अविनाश लुगुन ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों के गांव या खेत के आसपास पहुंचने पर उनके साथ छेडछाड नहीं करें. हाथियों को घेरकर भगाने का प्रयास नहीं करें और नजदीक जाकर फोटो या वीडियो भी नहीं बनायें. उन्होंने ग्रामीणों से हाथियों की मौजूदगी की सूचना तत्काल वन विभाग को देने की अपील की.

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By Bhushan Kanshi

भूषण कांशी ने 1998 में प्रभात खबर से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने सफर की शुरुआत की. रिपोर्टर के साथ न्यूज पेपर एजेंट के रूप में भी जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने पत्रकारिता की बुनियादी चुनौतियों और जमीनी हकीकत को करीब से समझा. अभी खूंटी ब्यूरो में भी बतौर सहायक काम कर रहे हैं. बीते 28 वर्षों से वह ग्रामीण एवं स्थानीय क्षेत्रों की समस्याओं और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाने में सक्रिय हैं. ग्रामीण समाज की आवाज को मंच देने, आम लोगों की समस्याओं को प्रशासन व जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने और उपेक्षित मुद्दों को समाचार के माध्यम से प्रमुखता देने को उन्होंने पत्रकारिता का उद्देश्य बनाया हुआ है. शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी, कृषि, रोजगार, वन्यजीव और सामाजिक विषयों से जुड़े मामलों पर उनकी निरंतर नजर रहती है. निष्पक्षता, तथ्यपरकता और जनहित …

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