सतीश शर्मा, तोरपा : खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय गढ़ा टोली एक मॉडल विद्यालय बन कर उभरा है. यहां प्रारंभिक कक्षाओं में मुंडारी भाषा में पढ़ाई होती है. इस विद्यालय में कक्षा केजी से कक्षा तीन तक के विद्यार्थियों को मुंडारी भाषा में पढ़ाया जाता है. स्थानीय मातृभाषा (मुंडारी) में पढ़ाई कराए जाने का सकारात्मक असर यहां के बच्चों में साफ तौर पर देखा जा सकता है. मातृभाषा में पढ़ाई शुरू होने से बच्चों की समझ बढ़ी है. उपस्थिति और सीखने की रुचि में भी उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है.
क्या कहते हैँ शिक्षक :
उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय गढ़ा टोली में मुंडारी भाषा में पढ़ानेवाले शिक्षक मुकेश राम विद्यालय के प्रधानाध्यापक भी हैं. वह बताते हैं कि विद्यालय में मातृभाषा आधारित बहु भाषीय शिक्षा के तहत जब से मुंडारी भाषा में पढ़ाई शुरू हुई है, तब से बच्चों में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है. उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपनी मातृभाषा में पढ़ते हैं तो वे विषयवस्तु को आसानी से समझ पाते हैं. पहले जहां अंग्रेज़ी या अन्य भाषाओं के कारण बच्चे पढ़ाई में पिछड़ जाते थे, वहीं अब स्थानीय भाषा में पढ़ाई से वे आत्मविश्वास के साथ सवाल पूछ रहे हैं और कक्षा गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा में पढ़ाने से बच्चों और शिक्षकों के बीच संवाद बेहतर हुआ है. इससे बच्चों में डर कम हुआ है और सीखने का माहौल सहज बना है.क्या कहते हैं अभिभावक :
मुंडारी में पढ़ाई होने से बच्चों के अभिभावक भी खुश हैँ. विद्यालय प्रबंध समिति की उपाध्यक्ष नीलम गुड़िया के तीन बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं. वो बताती है कि मुंडारी में पढ़ाई शुरू होने से बच्चे पढ़ाई में ज्यादा रूचि ले रहे हैं. उनका कहना है कि अब बच्चों की पढ़ाई अधिक आसान लग रही है. पढ़ाई की भाषा घर की भाषा से मेल खाती है. इससे घर पर दोहराव और अभ्यास आसान हो गया है. बुधवा होरो व बेरोनिका होरो बताती है कि स्थानीय भाषा में शिक्षा से बच्चों की बुनियादी नींव मजबूत हो रही है, जिसका लाभ आगे की कक्षाओं में भी मिलेगा. पार्वती होरो, चरकी मुंडाइन, बुधु होरो जो विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य भी हैं कहते हैं कि अब बच्चों को पढ़ाई रुचिकर लग रहा है तथा वे प्रतिदिन स्कूल जा रहे हैं.बच्चों में गुणवत्तापूर्ण सुधार हुआ है :
उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय गढ़ा टोली के विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष रेड़ा मुंडा कहते हैँ स्थानीय भाषा (मुंडारी) में पढ़ाई से बच्चों में गुणवत्तापूर्ण सुधार हुआ है. बच्चे विषय वस्तु को अच्छे से समझ रहे हैं तथा उनका परीक्षा परिणाम बेहतर हुआ है. प्रतिदिन स्कूल जाने से ड्रॉप आउट भी बंद हो गया है.
