लक्ष्य तय कर उसे पाने की ईमानदार कोशिश की जाये, तो इनसान को सफल होने से कोई रोक नहीं सकता. पिपरवार की अंजली के माता-पिता उसकी पढ़ाई के मार्ग में बाधक हैं. पिता शराबी है, मां मजबूर. लेकिन, अंजली ने ठान लिया है कि उसे पढ़ना है. सो, लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा करके पैसे कमाती है और उसी से पढ़ाई कर रही है.
विष्णु साहू
पिपरवार के वसंत विहार कॉलोनी, बचरा में एक 11 साल की लड़की है. नाम है अंजली कुमारी. पढ़ने में उसका बहुत मन लगता है. लेकिन, माता-पिता बेहद गरीब हैं. पिता बुधराम उरांव दिहाड़ी मजदूर है.
पिता को घर-गृहस्थी की कोई चिंता नहीं रहती. जो भी कमाता है, शराब में उड़ा देता है. मां अनपढ़ है. किसी तरह मजदूरी कर के घर चला रही है. इतना नहीं कमा पाती कि बेटी को स्कूल भेज सके, पढ़ने के लिए. माता-पिता दोनों ने बेटी से कह दिया कि वह पढ़ाई न करे. लेकिन, अंजली पर पढ़ने का धुन सवार है. ऐसे में उसने अपने बूते पढ़ने का मन बनाया.
चूंकि माता-पिता पैसे के अभाव में पढ़ने से रोक रहे हैं, अंजली ने खुद कमा कर पढ़ने की सोची. उसने आसपास के घरों में झाड़ू-पोछा का काम करना शुरू कर दिया. अब इतना कमा लेती है कि अपनी पढ़ाई का खर्च निकाल ले. प्रस्तावित बालिका उच्च विद्यालय बचरा में छठी कक्षा में पढ़नेवाली यह लड़की पढ़-लिख कर कुछ बनना चाहती है. हालांकि, अभी वह यह बताने में सक्षम नहीं है कि वह क्या बनना चाहती है. लेकिन, इतना तो तय है कि जिस लगन के साथ यह बच्ची पढ़ रही है, गरीब परिवार के बच्चों के लिए एक मिसाल बनेगी.
ज्ञात हो कि सीसीएल के कमांड एरिया में सीएसआर के तहत कई छात्र–छात्राओं को पढ़ाई के लिए मदद दी जाती है. अंजली को इसकी जानकारी नहीं है. यदि सीसीएल प्रबंधन से अंजली को भी मदद मिल जाये, तो उसे मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी. वह ध्यान लगा कर पढ़ाई करेगी.
