पिपरवार : पिपरवार एरिया में आरएफआइडी (रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस) का काम कच्छप गति से चल रहा है. मार्च 2014 में इसका ट्रायल तत्कालीन जीएम प्रभाकर चौकी द्वारा किया गया था.
बताया गया था कि एक-दो माह में अशोक परियोजना से आरसीएम साइडिंग के बीच होनेवाली कोयला ढुलाई पर इससे नजर रखी जायेगी. लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी यह सिस्टम सही ढंग से लागू नहीं हो सका. इस बीच पिछले दिनों पिपरवार जीएम एसएस अहमद ने विभागीय अधिकारियों के साथ आरसीएम साइडिंग का दौरा करने के बाद इसे चालू करने की पहल पुन: शुरू की. दो-तीन दिन पहले ट्रायल बेसिस पर इसे शुरू किया गया. लेकिन चरमरायी इंटरनेट सेवा के कारण इसमें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है.
क्या है आरएफआइडी सिस्टम : कोयला खदानों से डंपरों के माध्यम से साइडिंग भेजे जाने वाले कोयले की निगरानी के लिए यह सिस्टम लागू किया गया है. इस सिस्टम के तहत अशोक परियोजना खदान क्षेत्र व आरसीएम साइडिंग के दोनों छोर पर लगे कांटाघरों को सिस्टम से जोड़ा गया है. खदान जानेवाले खाली डंपरों का अशोक कांटाघर में वजन लिया जाता है.
फिर कोयला लोड डंपरों का वहां वजन किया जाता है. वहां से निकलने वाले डंपर जब आरसीएम साइडिंग पहुंचते हैं, तो यहां के कांटाघर में लोड डंपर व खाली डंपर का वजन कर भेजे गये कोयले का मिलान किया जाता है. ट्रांसपोर्टिंग के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर इसका पता आसानी से लग जाता है. इस सिस्टम के अंतर्गत आने वाले सभी कांटाघरों से गुजरने वाले डंपरों का डाटा कंप्यूटर के माध्यम से एरिया व सीसीएल मुख्यालय से जोड़ा गया है. इसके माध्यम से ढोये जानेवाले कोयले की मात्रा की जानकारी ऑनलाइन मिल जाती है.
